अरुण गोविल के घर में ख़ुशी की लहर, उत्तर प्रदेश में बनेगी राम की मूर्ति

सुनने में आया है की अरुण गोविल की चिंताएं तब बढ़ गयी जब सरकार ने उन्हें सिक्स पैक एब्स बनाने के निर्देश दिए|

Image Source: Hindustan Times
गुजरात में सरदार पटेल की नायाब मूर्ति के बाद अब उत्तर प्रदेश के विकास पुरुषो ने निर्णय लिया है की वो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की और बड़ी मूर्ति बनाएंगे|
अब चूँकि सच ये है की श्री राम को असलियत में तो किसी ने देखा नहीं है, और हमारे लिए तो यही हैं राम का चेहरा,
ये खबर सुनते ही श्री राम- यानि की अरुण गोविल के घर में खासा उत्साह उमड़ उठा|

श्री राम के रूप में मेरी मूर्ति बनाये जाने से मै खासा सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूँ – अरुण गोविल।

सुनने में आया है की अरुण गोविल की चिंताएं तब बढ़ गयी जब सरकार ने उन्हें सिक्स पैक एब्स बनाने के निर्देश दिए|
आजकल चलन में है एब्स। तो मूर्ति में सिक्स पैक एब्स बनाने ज़रूरी हैं| एक उत्तम मूर्ति बनाने के लिए ये ज़रूरी है की हम अच्छे से उसके सोत्र का अध्यन्न कर सके|
आज की युवा पीढ़ी सिक्स पैक एब्स से प्रेरणा ले रही है| तो हमारी सरकार उनकी भावनाओ की सराहना करते हुए श्री राम की जो मूर्ति बनाएगी उसमे इनको सम्मलित किया जायेगा|
पर इसके साथ ही विपक्ष ने कुछ सवाल भी खड़े कर दिए है|
१. राम प्रिये हनुमान: रा.गा के नाम से मशहूर विपक्षी नेता ने नया राग गाया है| श्री राम के साथ हनुमान जी की भी मूर्ति होनी चाहिए क्युकी हनुमान के बिना श्री राम अधूरे थे| इसी अलाप को आगे बढ़ाते हुए श्री करणी सेना के प्रमुख ने कहा है माता सीता के बिना अगर मूर्ति बानी तो वो विरोध करने सड़क पे उतरेंगे|
मायावती जी की मांग है की आज की महिलाओ का सम्मान करते हुए सीता माता के हाथ में एक डिज़ाइनर पर्स भी होना चाहिए| उन्होंने प्रमाण के तौर पर हमे अपनी मूर्ति की तस्वीर भी दिखाई| सुनने में आया है दारा सिंह जी के पुत्र ने भी सिक्स पैक एब्स बनाना शुरू कर दिया है|
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२. विपक्ष प्रमुख श्री रा.गा. ने एक विचित्र मांग करते हुए कहा है की वो चाहते है की जिस तरह सरदार पटेल की चीज़ो के साथ एक म्यूजियम गुजरात में बनाया गया है| उसी तर्ज पर श्री राम के द्वारा प्रयोग की गयी वस्तुए इस म्यूजियम में राखी जाए| वस्तुओ का उदहारण पूछे जाने पर वो बोले श्री राम का धनुष, संजीवनी बूटी वाला पहाड़, राम सेतु ये साड़ी चीज़े इस संग्रहालय में होनी चाहिए| मर्यादा और पुरुषोत्तम नाम की वस्तुओ का जिक्र भी किया पर साथियो के समझाने पे उन्होंने इसकी मांग वापस ले ली| पत्रकारों ने जब उनसे पुछा की क्या उन्हें अंदाज़ा है की श्री राम कब धरती पर आये थे तो वो बोले जी आज से ठीक पचीस साल पहले जब उनकी जीवनी दूरदर्शन पर दिखाई जाती थी|
३. शिलान्यास और उद्घाटन : श्री रा.गा. की मांग है की शिलान्यास और उद्घाटन खुद श्री हनुमान करे| पत्रकारों द्वारा टटोलने पर उन्होंने ये बताया की ऐसा माना जाता है श्री हनुमान आज भी धरती पर मौजूद है तो ये ज़रूरी है की शिलान्यास और उद्घाटन दोनों ही श्री हनुमान खुद करें|
इसके बाद कुछ नेताओ ने अपना विचार सामने लाया है और किसकी मूर्ति बनेगी।
१. मायावती कहती है की जब वो सत्ता में आएँगी तो इससे भी बड़ी मूर्ति अपनी और कांशी राम की बनाएगी
२. रा.गा. कहते है की वो जब सत्ता में आएंगे तो छोटा भीम की मूर्ति बनाये जिसे पूरी दुनिया देखती रह जायेगी|
भाजपा के बड़े नेताओ के होश उड़े हुए है ये बातें सुनकर| बरहाल अभी उनको तलाश है ऐसे शिल्पकार की जो श्री राम को जानता हो, जिसने उन्हें देख हो ताकि वो एक अच्छी मूर्ति बना सके|

यहाँ से ऊपर जो भी लिखा सब मनगढ़त है, नकली है, सच से कुछ लेना देना नहीं| ये एक कटाक्ष है, एक असली खबर पर जो ऊपर लिंक पर क्लिक कर के पढ़ा जा सकता है| नीचे लिखी गयी बातें हमारी व्यक्तिगत राय है|

सच्ची और कड़वी बातें
१. ये पैसा जिससे लेकर ये सब मूर्तियां बनायीं जा रही है ये कई कामो में लाया जा सकता था| इतिहास की जानकारी अगर लोगो को देनी है इतिहास की किताबें होती है| करोड़ो अरबो रूपए मूर्तियों पे खर्च फ़िज़ूल है| अगर आप चाहते है की लोग सरदार पटेल और श्री राम जैसे लोगो की बातों को समझे तो उन्हें बातें समझानी चाहिए| भारत में हर रोज़ कितने लोग भूखे सोते है? कितने बच्चे यतीम होते है? अगर इसके बारे आप जान्ने की कोशिश करेंगे तो समझेंगे की ये निहायती फ़िज़ूल है| बड़े लोग उनकी बातो के लिए जाने जाने चाहिए नाकि उनकी मूर्तियों के लिए|
२. मायावती की राजनीती भी मूर्तियों से थी| बहुत मूर्तियां बनवायी पर जनता देखती है और आज वो सत्ता से बाहर है| जब विज्ञापन में हमे दिखाया जाता है की आपके टैक्स के पैसे से एलपीजी कनेक्शन कितने गाँवो में पहुंचे| कितने शौचालय बने तो अच्छा लगता है पर जो नहीं बताया जाता वो ये है की कितना पैसा इन् चीज़ों में बर्बाद कर दिया|

जहाँ अस्पताल में बच्चे मरे हो ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी से , वहां मूर्तियां आवश्यक नहीं हो सकती |

बाकी आप लोग ज्यादा जानते है, हम तो वेले है, वेले रहेंगे|

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
velawrites
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वेला तेरी तरह। अब तू माने या ना माने दोस्त मेरे , मैंने तो तुझे वेला माना। http://velawrites.in/

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