​पुराने कपड़े में होली खेलने निकले युवक को भिखारी समझ सब देने लगे चिल्लर !

बिहार में होली को पुराने कपड़े पहन कर खेलना एक युवक को इतना भारी पड़ गया कि उसने ये सपने में भी नहीं सोचा होगा, बेचारा फ्री में बेज्जत हो गया।

छपरा: होली का त्यौहार आते ही सब लोग इसको बड़े धूम-धाम से मनाने में जुट जाते हैं। लोगों में इस दिन खाने -पीने और रंग लगाने और लगवाने का एक अलग ही उत्साह रहता है। होली को देखते हुए लोग अपने पुराने कपड़े निकालने लगते हैं, जिसे पहन कर वो होली खेल सकें। हालाँकि भारतीय परंपरा के अनुसार पुराने कपड़े को पोछा बना दिया जाता है, लेकिन एकाध कपड़े होते ही हैं, जिसे लोग बचा कर रखते हैं, ताकि होली में उसका सदुपयोग कर सकें।

बिहार में होली को पुराने कपड़े पहन कर खेलना एक युवक को इतना भारी पड़ गया कि उसने ये सपने में भी नहीं सोचा होगा। इतना अपमान उसका जिंदगी में शायद ही कभी हुआ हो, जितना उसके साथ इस होली में हो गया।

Holi Torn Clothes
फटे-चिथड़े पहने योगेंद्र यादव चिल्लर मुट्ठी में भींचे मुस्कुराते हुए. (साभार: विकिमीडिया)

घटना बिहार के छपरा जिले की है। यहाँ पर योगेंद्र यादव नाम का एक युवक होली की तैयारी में बहुत पहले से जुट गया था। दोस्तों के साथ उसने एक गुप्त अड्डे पर होली में खाने-पीने का प्रोग्राम बनाया था। आपको याद दिला दें कि बिहार में शराब बेचना और पीना गैर-क़ानूनी है। तो इन लोगो का विशेष अड्डा इस बात को भी ध्यान में रख कर बनाया गया था ताकि पुलिस की रेड इन पर ना पड़े। सभी ने सोच विचार कर फैसला लिया कि घर में होली खेलने के बाद वो इस अड्डे के लिए रवाना होंगे, ताकि किसी को शक भी ना हो, और खाने-पीने का लुफ्त भी उठा सकें।

योगेंद्र यादव भी योजना के मुताबिक़ ही घर पर बाल-बच्चो संग होली खेलने के बाद 11 बजे के करीब गुप्त अड्डे के लिए रवाना हो गये। योगेंद्र यादव ने जाने से पहले उनके सबसे पुराने और फटीचर कपडे निकाल कर पहन लिए, ताकि ख़राब होने पर भी कोई गम ना हो। बस योगेंद्र यादव यहीं चूक गये। योगेंद्र यादव ने इतने पुराने कपड़े पहन लिए कि लोग उनको भिखारी समझने लगे, और उनको रास्ते में देखते ही 1 या दो रु के चिल्लर उनकी तरफ बढ़ा देते, और बेचारे योगेंद्र यादव शर्म के मारे झेप जाते।

इतनी तरह से अपमानित बेचारे अपने जीवन में कभी नही हुए थे, लेकिन उन्होंने इसको सही तरीके से लिया।

इस तरह घटना पुरे रास्ते भर चलती रही। योगेंद्र यादव के पास इतने चिल्लर जमा हो गए कि वो अड्डे पर जाने से पहले बहुत सारा चखना खरीद लिए, और अड्डे पर पहुँचने के बाद दोस्तों के सामने दिलदार भी साबित हो गए।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Shubham
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कुछ नहीं से कुछ भी बनाने की कला।

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