लैला की भक्ति की मिसाल पेश करती है- ‘लैला मैं लैला’ आइटम सॉन्ग

कम लोग जानते हैं कि सनी लियॉन पर फिल्माया गया रईस फिल्म का आइटम सांग 'लैला मैं लैला' दरअसल एक भक्ति गीत है। तो लीजिये, हम आपको इसका मतलब बताये दिए देते हैं।

​शाहरुख़ ख़ान की नयी फिल्म “रईस” में एक आइटम सॉन्ग रखा गया है- “लैला मैं लैला”, जिसमें सनी लियोनी ने अपने आइटम नंबर पर जलवा बिखेरा है। हालांकि ये पुराने गाने का ही नया रूप है, सनी लियोनी के साथ। जैसा कि उम्मीद थी, उस मुताबिक इस फिल्म का कोई खास विरोध नहीं हुआ। इसके पीछे का सच जान कर आप भी सदमे में रह जायेंगे।

दरसअल शाहरुख़ ख़ान पहले ही इस फिल्म का विरोध करने वालों से मिल कर उन्हें ‘लैला मैं लैला’ का भक्ति रूपी अर्थ समझा चुके हैं, जिसके बाद सभी विरोध करने वाले शांत हो गए। हालांकि आम धारणा अभी भी यही है कि ये एक आइटम सॉन्ग है। लेकिन हम आपको आज एक्सक्लूसिव इस गाने का सूफ़ियाना अंदाज़ और इसकी गहराई में छुपे अर्थ बताना चाहेंगे-

Laila Main Laila Sunny Leone
तू मेरा परमेश्वर- मैं तेरी लैला!

गाने का शुरुआती अन्तरा कुछ इस प्रकार है:

लैला मैं लैला, ऐसी मैं लैला, हर कोई चाहे मुझसे मिलना अकेला।

भक्तिन यहाँ पर कहना चाहती है कि भगवान के भक्त हमेशा कबीर या मीरा ही क्यों हों? लैला क्यों नहीं हो सकती है। वो कहना चाह रही है उसका नाम लैला है, दुनिया में एक दम नयी भक्त है, भगवान की मीरा या कबीर की तरह प्राचीन नहीं। उससे हर कोई मिलना चाहता है, फिर भगवान् उससे क्यों नहीं मिल सकते?

जिसको भी देखूं दुनिया भुला दूँ, मजनू बना दूँ, ऐसी मैं लैला।

इस पंक्ति में लैला अपना बड़प्पन करती दिख रही है। लैला भगवान् के सामने अपनी अहमियत बताने के लिए अपनी क्वालिटी का बखान कर रही है। लैला भूखी-प्यासी आगे बताती है कि उसको देख लेने के बाद तो लोग दुनिया को ही भूल जाते हैं, और उसके दीवाने बन जाते हैं, ऐसी लैला है वो, कोई ऐरी गैरी आम भक्तिन नहीं।

ओ, कैसे हैं ये लम्हे, जो इतने हसीं हैं, मेरी आँखें मुझसे क्या कह रही हैं।

लैला भूख प्यास से और पूजा करते करते थक के चूर हो चुकी है। लैला को लग रहा है कि उसकी आँखें उससे कुछ बोलना चाह रही हैं, लेकिन ग्लूकोज़ की कमी के चलते वो थक के निढाल हो रही है, जिसके कारण वो अपने अँखियों की भाषा समझ पाने में असमर्थ हो रही है।

तुम आ गये हो, यकीन कैसे आये, दिल कह रहा है, तुम्हे छू को देखूँ।

आखिरकार भगवान् अपने परम भक्त लैला की भक्ति देख कर पसीज गये, और लैला के सामने प्रकट हो गए। लेकिन लैला के इस मानवरूपी शरीर में लगातार हो रही ग्लूकोज़ की कमी से वो कुछ भी सोचने समझने में असमर्थ हैं। इसलिए वो भगवान से कह रही है कि, हे! प्रभु, आप प्रकट तो हो गए हो, लेकिन भरोसा नहीं हो रहा है। ये कलयुगी छल-कपट वाला दिल जो लगातार मेरे अंदर रक्त संचार कर रहा है, मुझसे कह रहा है कि आपको छू लूँ।

मोहब्बत का डसता तुम्हें नाग है क्या, तुम्हारे दिल में लगी आग है क्या।

लैला भगवान के पास नाग देख कर अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाती है, और पूछती  है- ये प्रेम रूपी नाग आपको डसता नहीं है क्या? इतने सवाल पूछने के बाद भी लैला का निच्छल स्वछंद मन भोलेपन से और सवाल कर देता है। उनके दिल में आग लगी है क्या, जो इतने प्रकाश निकल रहे हैं उनके शरीर से!

मेरे लिए क्या तड़पते हो तुम भी, बेताब जैसे, मैं तुम्हारे लिए हूँ।

अब लैला भावनाओं में बह चुकी है, और वो पूछती है- जब से मुझे भक्ति का रोग लगा है, उसके बाद जिस तरीके से वो तड़पी है, क्या भगवान् भी उसके लिए तड़पे हैं?

लैला मैं लैला, ऐसी मैं लैला….

अबोध भक्त के अचानक इतने सारे सवाल पूछने से भगवान् कुछ परेशान हो जाते हैं। होठों से मुस्कुराहट गायब नहीं होती, लेकिन वो लैला के सामने से जरूर गायब हो जाते हैं। जिसके बाद लैला वापस से पूर्ण उसी अंदाज में भक्ति गायन करने लगती है, और अपने भगवान् को फिर से बुलाने में व्यस्त हो जाती है।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Shubham
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कुछ नहीं से कुछ भी बनाने की कला।

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