BMC चुनावों की कुछ चटपटी और अनसेंसर्ड खबरें

आपके शहर की नगर पालिका चुनाव कब होते हैं और उसमे कौन सी पार्टियां शामिल होती हैं, ये आपको आज तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन BMC चुनाव की ज़रूर खबर होनी चाहिए।

मुम्बई: जैसा कि आप सभी जानते हैं कि बीते दिनों BMC चुनाव संपन्न हुए, हालाँकि ये बात अलग है कि आपके शहर की नगर पालिका चुनाव कब होते हैं और उसमे कौन सी पार्टियां शामिल होती हैं, ये आपको आज तक पता नहीं चल पाया है। मगर BMC चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि इसमें चुने जाने वाले मेयर को दिल्ली के मुख्यमंत्री से ज्यादा अधिकार प्राप्त हैं। इसी मौके पर तीखी मिर्ची रिपोर्टर विकास पुरोहित आपके लिए लेकर आएं हैं मुम्बई महानगर पालिका चुनावों से जुडी कुछ खबरें, जो मीडिया में आने से रह गई:-

Brihanmumbai Municipal Corporation - BMC Election 2017
यहीं होता है सारा गोरखधंधा! (फोटो साभार: विकिमीडिया )

१. इस चुनाव में शिवसेना और बीजेपी की लड़ाई तो सभी ने देख ली, पर आपमें से शायद ही कोई जानता हो कि इस लड़ाई के पीछे सबसे बड़ा हाथ समाजवादी पार्टी का है। अब आप ये सोचने लग गए कि सपा तो इस चुनाव में शामिल ही नहीं तो उसका हाथ कैसे हुआ, तो हम आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश चुनावों में सपा की लड़ाई से प्रेरणा लेकर ही इस लड़ाई का ताना बाना बुना गया। हालाँकि यहाँ बाप-बेटे का रिश्ता नहीं था, इसलिए लड़ाई दो भाईयों जैसी पार्टियों में रची गई।

२. चुनाव प्रचार का जो तरीका अपनाया गया वो भी अपने आप में सबसे अलग था। जगह और मैदानों की भारी कमी के चलते सारी चुनावी रैलियों को व्यस्त चौराहों पर आयोजित किया गया,।इससे एक फायदा तो ये हुआ कि नेताओं का खर्च बच गया, तो वहीँ दूसरी तरफ जनता का भी ट्रैफिक जाम में खड़े-खड़े मन बहल गया।

३. हर बार की तरह इस बार भी साल भर बाहर रहने वाले और मुम्बई की समस्याओं से “बहुत ज्यादा” मतलब रखने वाले सभी फ़िल्मी सितारों ने वोट डाला। ये बात अलग है कि उनमे से आधे लोगों को भी उम्मीदवारों के नाम तक पता नहीं थे। कुछ अभिनेता तो पोलिंग बूथ पर मीडिया को न पाकर बिना वोट डाले ही लौट गए।

४. उन लोगों ने भी चुनाव में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जो खुद ही समस्याओं के जिम्मेदार थे। कई लोग सफाई न होने की शिकायत का मुद्दा लेकर वोट डालने आये थे मगर लाइन लंबी होने के कारन गली के मोड़ पर ‘हल्के’ होते रहे।

५. इन चुनावों में हमेशा के विपरीत इस बार राज ठाकरे बिलकुल मीडिया खबरों से बाहर रहे। इसके पीछे कयास लगाए जा रहे हैं कि नोटबंदी के कारण उत्तर भारतियों की पिटाई करने वाले गुंडों का पेमेंट नहीं हो पाया था, और इसी वजह से वो प्रचार के लिए कार्यकर्ता नहीं जुटा पाए।

६. NCP का चुनावों से नदारद रहना भी विवादों में रहा। इसके पीछे कई लोगों से बात करने पर पता चला कि जो पैसा प्रचार के लिए रखा गया था, वो पद्म विभूषण पाने के बाद किसी उपयोगी कार्य में लगा दिया गया। ये उपयोगी कार्य कौन सा था इस पर अभी तक संशय बरक़रार है।

और भी इसी तरह की खबरों के लिए पढ़ते रहें तीखी मिर्ची। ख़बरें जो मिर्ची सी लगें (किसको, वो नहीं बताएंगे!)

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Vikas Purohit
About Vikas Purohit 27 Articles
A writer and a poet.

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