फिल्म समीक्षा: कहानी 2 के उम्मीद के मुताबिक न कमा पाने का विश्लेषण

कहानी की सफलता के बाद कहानी २ से खासी उम्मीद लगायी जा रही थी, जो ये फिल्म पूरा नहीं कर पायी। जानिये क्या हैं उसके कारण, सीधा फिल्म देखने वालों से उन्ही की ज़बान में।

Kahaani 2 Box Office Collection: कहानी की सफलता के बाद कहानी २ से खासी उम्मीद लगायी जा रही थी, जो ये फिल्म पूरा नहीं कर पायी। जानिये क्या हैं उसके कारण, सीधा फिल्म देखने वालों से उन्ही की ज़बान में।

कुछ वर्षों पहले आयी फिल्म कहानी तो सबको याद ही होगी। इस फिल्म का नाम कहानी इसीलिए था क्योंकि बहुत वर्षों बाद बॉलीवुड की सुखी ज़मीन पर बारिश की एक बूँद गिरी थी, और इनकी एक फिल्म में कहानी मिली थी। और ये अपना एक खास रुतबा बनाने में कामयाब रही थी। इसी फिल्म का सीक्वल, एक प्रचलन, सिर्फ नाम को भुनाने का, के अन्तर्गत दूसरी कड़ी में कहानी २ रिलीज़ की गयी है। इससे बहुत ज्यादा उम्मीदे लगाई जा रही हैं, कौन लगा रहा था, ये नहीं बताएँगे। पर इस फिल्म को उम्मीद से काफी कम कमाई के बाद लोग चकित हैं, ऐसा क्यों हुआ। जो लोग फिल्म देख कर आ रहे हैं, उन्हें भी फिल्म पसंद आ रही है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

Kahaani 2 Poster
कहानी 2 का पोस्टर।

१. विमुद्रीकरण: एक कारण ये बताया जा रहा है, खासकर छोटे सेंटर्स में। न लोगों के पास पैसे हैं, न मिलने के आसार दिखाई दे रहे हैं। और जिस तरह सरकार हालात काबू में आने की समय सीमा बढ़ाये जा रही है, कोई अनुमान नहीं है कब पैसे ठीक होंगे।

२. कमजोर: कहानी के मुकाबले ये फिल्म कुछ कमजोर बताई जा रही है।

३. धोखा: हमने लोगों से बात की जो फिल्म आधी में छोड़ के बाहर निकल रहे हैं, और जिन्हें देख कर टिकट लाइन में खड़े लोग मन बदल रहे हैं। चम्पू जी ने हमे बताया कि वैसे ही पैसे की कमी है, और ये फिल्म हमारा मज़ाक उड़ा रही है।  तफ्सील से बताना शुरू किया तो उन्होंने कहा- फिल्म में एक चौक दिखाया गया है बार-बार, जहाँ SBI का एटीएम है, और वो बिलकुल खाली है। हम तो ये देखने निकले थे कि हमारा वाला भी खाली है क्या।

फिर एक दूसरे सीने में विदया बालन अपने बैंक में से सारा पैसा निकाल कर अकाउंट बंद कर देती है। ये एंटी-मोदी स्टैंड है, बैंक मेनेजर की मिली भगत के बिना यह बिलकुल मुमकिन नहीं है। जहाँ ममता बनर्जी एक तरफ मोदी जी को बदनाम करने की जी-तोड़ कोशिश कर रही हैं, वहीँ दूसरी ओर उनके शहर में बनी ये फिल्म साफ़ साफ़ दिखा रही है कि बैंक मैनेजर्स ही लोगो का जीवन दुर्भर कर रहे है वहाँ।

हमारे संवाददाता वहां से निकल गए, ये आखरी शब्द बोलते हुए- “भक्त भक साला”।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
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