फेस्टिव सीजन में आये ऐड वाले अखबार बेचकर व्यक्ति ने खरीदा आईफोन 7

आपने किडनी बेचकर आई फ़ोन खरीदने के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन अखबारों की रद्दी बेचकर आई फ़ोन 7 खरीदने का मामला पहली बार प्रकाश में आया है।

फेस्टिव सीजन आते ही जनमानस पर विज्ञापनों की बौछार होने लगती है।  सामान्यतया अखबारों के साथ विज्ञापन आते हैं, पर त्योहारों के मौसम में विज्ञापनों के साथ थोड़ा-सा अखबार आता है। पता ही नहीं चलता कि विज्ञापन ही खबरें हैं या ख़बरों का ही विज्ञापन है। हर रोज तरह-तरह के लोकलुभावन पेशकशों को देख-देखकर बड़े से बड़े विश्वामित्र का मन डोल जाता है, और  विज्ञापन लोगों की जेब पर सफलतापूर्वक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर देते हैं। फिर भी कुछ जघन्य कंजूस ऐसे होते हैं जो खुद को केंचते रहते हैं और विज्ञापन के हमले से भी बच निकलते हैं , पर धनतेरस पर कुछ न कुछ खरीदने की मान्यता या विवशता के आगे हथियार डाल देते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भले ही धन के लिए तरस रहे हों फिर भी धन्ना सेठों की तरह खरीददारी करेंगे।

truck full of newspaers
रद्दी अखबारों को ले जाता हुआ ट्रक।

तीखी मिर्ची  के एक सुधी पाठक जुगनू जुगाड़िया ने धनतेरस पे कुछ नायाब तरह की शॉपिंग की है। जी हाँ, जंगपुरा निवासी जुगाड़िया जी ने इस फेस्टिव सीजन में आये विज्ञापन वाले रद्दी अखबारों को बेचकर आईफोन 7 खरीदा है। आपने पूर्व में किडनी बेचकर आईफोन खरीदने की कहानियाँ बहुत सुनी होगी। लेकिन जुगनी जुगाड़िया पहले ऐसे इंसान हैं जिन्होंने विज्ञापन वाले अखबार बेचकर 62 हज़ार का आईफोन 7 खरीदा है। हमने जब जुगाड़िया जी से उनके इस हैरतअंगेज़ जुगाड़ पर आईफोन वाला फ़्लैश लाइट जलाकर प्रकाश डालने को कहा तो उन्होंने कंधे उचकाते हुए कहा, “इट्स सो सिंपल मैन ! लोग विज्ञापन और मार्केटिंग की मदद से प्रधानमंत्री बन जाते हैं, मैंने तो विज्ञापन वाले अखबारों से एक आईफोन ही खरीदा है।”

जुगनू जी आगे बताते हैं कि, “यू नो दुर्गा पूजा से दीवाली तक फेस्टिव सीजन चलता है। पर्व के एक हफ्ते पहले से ही अख़बार विज्ञापन का बोझ उठाना शुरू करते हैं और दीपावली आते-आते एक-एक अखबार ढाई-तीन किलो का हो जाता है। तो जैसे ही मैंने देखा कि न्यूज़ पेपरों के पैर भारी होने शुरू हुए, मैंने अपने हॉकर को हिंदी-अंग्रेजी के सारे अखबार देने के लिए कह दिया। देखते-ही-देखते घर में विज्ञापन सहित अखबार के थाक लगने शुरू हो गए और धनतेरस आते-आते इनका वजन कुल मिलाकर दस टन हो गया।  फिर क्या था मैंने पूरी दिल्ली के कबाड़ी वालों को बुलाकर उन्हें सारे रद्दी बेच दी और प्राप्त रकम से एक नया आईफोन 7 अपने हाथ में कर लिया।”

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Kumar Keshav
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आजादीपसंद, स्वच्छन्द, आरामतलबी, अमितभाषी

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