…तो जान-बुझ के लीक किया गया “उड़ता पंजाब” को!

तीखी मिर्ची को पता चला है कि उड़ता पंजाब की सेंसर वाली कॉपी दरअसल किसने लीक को, और इसके पीछे क्या मकसद था।

पिछले कुछ दिनों में उड़ता पंजाब ने बहुत सुर्खियां बटोरी हैं।

संस्कारी पहलाज ने इसे रोकने की भरपूर कोशिश की, लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसके रिलीज़ का रास्ता साफ़ हो गया है।

Udta punjab copy meant for censor board leaked
जान बूझकर सेंसर बोर्ड को दी गयी कॉपी लीक की गयी जिससे दर्शक फ़िल्म का पूरा अनकट मज़ा ले सकें।

पहलाज ने कुछ भी लाज ना करते हुए यहाँ तक बोल दिया कि “मैं मोदी का चमचा हूँ”।

जब इस बात की खबर फ़िल्म निर्देशक को लगी तो उनको समझ आ गया कि अब इस फ़िल्म का कुछ नहीं होने वाला है, फ़िल्म तो बैन हो के ही रहेगी।

फ़िल्म के निर्देशक को ये कहावत याद आ गयी – “पहले चांदी की चम्मचे हुआ करती थीं, और आज कल तो चमचो की चांदी हैं”।

लेकिन फिर किसी ने सुझाव दिया कि अपने हक़ के लिए लड़ के तो देखो, जिससे उनको कुछ आशा की किरण तो दिखायी दी, लेकिन हौसला नहीं मिल रहा था। उन्हें लग रहा था कि, हो ना हो अगर जज भी चमचे ही निकले तो उनकी फ़िल्म धरी की धरी रह जायेगी।

फ़िल्म निर्देशक की इस परेशानी में देखना उनके एक सहकर्मी को अखड़ गया। उसने फैसला लिया कि चाहे कुछ भी हो जाएँ समाज को आईना दिखाती फ़िल्म लोगों तक जरूर पहुँचेगी।

बस उसने फ़िल्म को लीक कर दिया।

इधर न्याय व्यवस्था से फ़िल्म को हरी झंडी मिलने के बाद निर्देशक ने बताया कि उन्हें गर्व हैं कि वो भारत जैसे देश में रहते हैं, और पहलाज पर कटाक्ष करते हुए उन्होने कहा कि कुछ जगह तो अभी भी बाकी हैं, जहाँ चमचो की नहीं चलती है।

निर्देशक ने उम्मीद जतायी की लोग उनकी मेहनत को समझेंगे, और लीक हुयी फ़िल्म का बायकॉट कर के थिएटर में ही फ़िल्म देखेंगे।

तीखी मिर्ची भी अपने पाठकों से उम्मीद करता है वो लीक हुयी फ़िल्म का बायकॉट कर के थिएटर में ही फ़िल्म देखें।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Shubham
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कुछ नहीं से कुछ भी बनाने की कला।

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