रामदेव और श्री श्री रविशंकर के बाद अब आसाराम ने भी ठुकराया नोबेल

श्री श्री रविशंकर के इस खुलासे के बाद कि उन्होंने शांति के नोबेल पुरस्कार का ऑफर ठुकरा दिया था, आज जेल में सजा काट रहे आसाराम बापू ने भी ऐसा ही दावा किया।

देश में क्लीन चिटों और पद्म पुरस्कारों की बंदरबांट के बाद लगता है अब अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों की वैल्यू भी धड़ाम से गिर चुकी है। निशाने पर है प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार। पहले बाबा रामदेव ने कहा कि काला होने की वजह से उन्हें नोबेल नहीं मिला (वरना वो सबसे लायक थे), और अब आज श्री श्री रविशंकर ने भी खुलासा कर दिया कि उन्होंने शांति के नोबेल पुरस्कार का ऑफर ठुकरा दिया था, और मलाला नोबेल के लायक नहीं थी। किसी शायर ने खूब कहा है-

इत्ती शिद्दत से तुझे पाने की जिद थी ऐ ‘ग़ालिब’,
कि अब कोई भी चलेगी, बस तू ना चाहिए।

Asaram Bapu Angry
नोबेल पुरस्कार का ऑफर मना करते आसाराम बापू.

लेकिन हद्द तो तब हो गयी जब आज जेल में सजा काट रहे आसाराम बापू जी ने भी प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर नोबेल पुरस्कार का ‘ऑफर’ ठुकरा दिया। तीखी मिर्ची  ने जब मामले कि पड़ताल की तो पता चला कि आसाराम बापूजी को शांति का नहीं, बल्कि साहित्य का नोबेल पुरस्कार ऑफर किया गया था।

तीखी मिर्ची  के पाठकों को याद होगा कि पिछले साल ही आसाराम ने एन. डी. तिवारी जी के साथ मिलकर एक एंटी-रेप पार्टी लांच की थी, और इस मौके पर आसाराम की किताब ‘महिला सशक्तिकरण में नैतिक मूल्यों की भूमिका’ का विमोचन भी किया गया था। सूत्रों के अनुसार आसाराम को इसी किताब के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार ऑफर किया गया था।

इस मौके पर आसाराम ने रविन्द्रनाथ टैगोर को भी आड़े-हाथों लिया, और उनकी रचनाओं को ‘मामूली’ बताया।

इस बीच खबर है कि ‘मस्ती’, ‘ग्रैंड मस्ती’ और ‘किस्मत लव पैसा दिल्ली’ (केएलपीडी) जैसी फिल्मों के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने भी ऑस्कर पुरस्कार ठुकरा दिया है।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Amresh
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