मोदीजी फिर मुकरे अपने वादों से, हताशा का माहौल

अपने वादों से मुकरने में महारत हासिल किये "नरेंद्र मोदी" एक बार फिर अपने वादों से मुकर गए हैं। इस बार का मामला और भी पेचीदा है, क्योंकि इस बार ये आरोप किसी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि शेरो ने लगाये हैं।

अपने वादों से मुकरने में महारत हासिल किये “नरेंद्र मोदी” एक बार फिर अपने वादों से मुकर गए हैं।

इस बार का मामला और भी पेचीदा है, क्योंकि इस बार ये आरोप किसी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि शेरो ने लगाये हैं। जी हाँ आपके आँखों को कुछ नहीं हुआ है, और ना ही आपको डॉक्टर के पास जाने की जरुरत है, क्योंकि आप ने जो भी पढ़ा वो सौ फीसदी सच हैं!

आरोप किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि शेरों ने लगाये हैं।

(आपके जनरल नॉलेज को बढाने के लिए तीखी मिर्ची आपको बता रहा है कि तीखी मिर्ची के सवांददाता को मिली विशेष ट्रेनिंग के कारण वो सभी की भाषा समझ सकते हैं, और उस भाषा में बात कर सकते हैं। कैसी होती हैं ये ट्रेनिंग, और क्यों सब के वश की बात नहीं हैं ये ट्रेनिंग, ये तीखी मिर्ची आपको बाद में बताएगा।)

जी हाँ, अगर आपको याद हो तो आपने एक फ़ोटो जरूर शेयर किया होगा, जिसमे नरेंद्र मोदी तीन शेरों के साथ नज़र आ रहे हैं-

Narendra Modi walking with Linons, photoshopped picture of Kingfisher calendar girls.
मोदीजी की शेरों के साथ निर्भीक टहलकदमी करती तस्वीर, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी.

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं इस फ़ोटो की, जिसमे नरेंद्र मोदी जिन तीन शेर के साथ नज़र आ रहे हैं, उनके नाम हैं- भीमसेन, प्रताप सिंह और मान सिंह। (दायें से बायें)

हमारे विशेष सवांददाता को जब भेजा गया भीमसेन, प्रताप सिंह और मान सिंह से बात करने के लिए, तो उनकी व्यथा सुनकर हमारे सवांददाता के आंखों से आंसू की गंगा जमुना बहने लगी।

(यहाँ गंगा जमुना का उपयोग वाक्य के अनुसार हुआ है, भक्त कृपया इसे धार्मिक भावना से ना जोड़ कर देखें।)

हमारे सवांददाता ने बताया कि भीमसेन, प्रताप सिंह और मान सिंह को इस बात का लालच दिया गया था कि रोज़ उन्हें 15-15 शेरनियां मिलेंगी, उन्हें रोज़ 10 बकरियों के सर खाने को मिलेंगे, उनके जंगल को  स्मार्ट जंगल बना दिया जायेगा, उनके अच्छे दिन आ जायेंगे!

ये लोग भी लालच में फंस कर फोटु खिचवा लिए, लेकिन बाद में पता चला इन्हें ‘शेर’ से ‘उल्लू’ बना दिया गया है।

भीमसेन, प्रताप सिंह और मान सिंह ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद मोदी ने उनकी तरफ देखा तक नहीं हैं। इन लोगों ने कहा कि इस वादा-खिलाफी के खिलाफ वो कोर्ट भी नहीं जा सकते हैं, क्योंकि वहाँ उनकी सुनने वाला कौन है?

भीमसेन, प्रताप सिंह और मान सिंह ने कहा कि ये उनकी गलती थी, जो नेता के दिखाए गए सपनों को सच समझ बैठे थे। इन लोगों ने आगे से कभी भी किसी नेता जात पर भरोसा ना करने की कसम खायी, और अपनी किस्मत खुद बदलने के लिए कमर तोड़ मेहनत करने के लिए तैयार हो गए हैं।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Shubham
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कुछ नहीं से कुछ भी बनाने की कला।

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