#SelfieWithDaughter पर जनता के मन की बात

देशके PM मोदीजी ने “मन की बात” में बेटियों के साथ सेल्फ़ी लेके, टैग मारके (मन करे तो पेग मारके) मोदीजी को Send करने की नवीनतम अभियान की घोषणा कर दी। बेटियां मानो प्रदर्शनी की चीजवस्तु हो। सेल्फ़ी भेजने से या देखने से क्या हांसिल होगा, कौनसी धन्यता प्राप्त हो जाएगी, देश में कौनसा महा बदलाव आ जायेगा ( जो आजतक का कोई प्रधानमंत्री नहीं ला सका ) अपनी तो समझ के बाहर है ! ” बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ” बहुत ही जरूरी और अच्छा अभियान है इसमें कोई दो राय हो ही नहीं सकती। लेकिन यह सेल्फ़ी वेल्फ़ी का तिकड़म महा बकवास ख्याल है। बेटियाँ है तो है। सभी को प्यारी लगती है। उनका सोशल मीडिया में Exhibition करने की कोई जरूरत ही नहीं।

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व्यंग्य : Selfie का भी वक़्त होता है, “देश की बिटिया “। जावो अपने मातापिता या बेटीके साथ खींचो।

  • यह #SelfieWithDaughter वाला तिकड़म Android Internet मोबाइल धारी माता- पिता के लिए ही हुआ। जो असमर्थ है वो अपनी बेटियोंको लेकर पडोशी से सेल्फ़ी खिंचवाकर मोदीजी को भेजता फिरेगा क्या ?
  • परिवार में बेटी के साथ बेटा भी होता है। वो सेल्फ़ी के लिए टांग नहीं खिंचेगा क्या ? सेल्फ़ी नहीं खिंचा तो वो नाराज़ होकर बैठ गया तो फिर उसको मनाते फिरो !
  • परिवार में पत्नी और बुज़ुर्ग माता पिता भी हो सकते है। सभी के लिए कोई ना कोई अभियान तो चल ही रहा है। नहीं चल रहा है तो चलवादो। और पुरे परिवार का ग्रुप फोटो सेल्फ़ी मंगवाकर एकबार में ही झंझट ख़त्म करो भाई।
  • रस्ते में कोई रोक कर बोले, बेटा ! : मेरी भी इन बेटियोंके साथ मेरा सेल्फ़ी लेकर #SelfieWithDaughter पर प्रधानमंत्री जी को भेजने की महेरबानी कर दो ना ! तब क्या होगा ?

मतलब इतना है यह कोई अभियान ना होकर कोई मज़ाक जैसा ही है। ” बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ” जो अच्छा अभियान है उसे असरकारक तरीके से सार्थक करने के बजाय #SelfieWithDaughter वाली नौटंकी करके अपनी विचारधारा का दिवालियापन ही प्रदर्शित हो रहा है।

  • is a private and intimate property. How and why should be published on social media and for what ??? ~just a opinion

* यह व्यंग्य या कटाक्ष किसीको रोकने टोकने के लिए नहीं है। धन्यवाद।

 

Discussion

comments

डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Vishnu Tibdewala
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हास्य हेतु व्यंग्य। कटाक्ष ना समझे। कटाक्ष को व्यंग्य ना समझे।

1 Comment

  1. ये नही पता है की व्यंगात्मक होता है की व्यंगनात्मक
    और चले हो ज्ञान देने

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