तुम चार सिर कब लाओगे?

बड़बोला त्रिवेदी की कलम से, देश के दबे-कुचले निरीह आम आदमी के दिल से निकला बस एक ही सवाल-

मित्रों, ये छप्पन इंच की छाती है, ये अपना किया वादा निभाती है!
मित्रों, ये छप्पन इंच की छाती है, ये अपना किया वादा निभाती है!

पिछले साल 56 इंच के सीने का दवा करने वाले महा फेकू श्री श्री नरेन्र्द भाई मोदी आज कल जरा बीजी हैं, और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जो सरहद पर जाने को तैयार थे, आज कल नदारद है. अपनी तुकबंदी के माध्यम से बस ये सवाल है मेरा:

तुम चार सिर कब लाओगे, तुम चार सिर कब लाओगे?

शत्रु सीमा लांग चुका है, हर सब्र का टूट अब बाँध चुका है,
लहू बहा है, जान गईं है, घाटी बन शमशान गयी है,
दुश्मन भर हुंकार रहा है, जो बोले थे कर पाओगे?

तुम चार सिर कब लाओगे, तुम चार सिर कब लाओगे?

अभिमान समझ तुम चुने गए थे, हर रात -पहर तुम सुने गए थे,
हल्ला बहोत मचाये थे तुम, इलज़ाम बहोत लगाये थे तुम,
जब करने बारी आई, तुम फिर “डीलिंग” दे जाओगे?

तुम चार सिर कब लाओगे, तुम चार सिर कब लाओगे?

समय है काम और बहुत है, तुमसे जन का ये आव्हान “बहुत” है,
करे पे पानी फेर न देना, ए “व्यापारी ” घर बेच न देना,
विकास करो जो  दिखाई दे, या बस मॉडल- मॉडल चिल्लाओगे?

तुम चार सिर कब लाओगे, तुम चार सिर कब लाओगे?

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
बड़बोला त्रिवेदी
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