JAB WE MET: NamObama

Jab We Met: जब ओबामा मिले मोदीजी से और की चाय पे खर्चा। इस बारे में आम जनता कैसी गपशप कर रही है, यहाँ पढ़ें:

JAB WE MET: मेरा दोस्त भिडू चार दिन बाद गॉव से वापस आ रहा है। उसे लेने बस अड्डेपर जा रहा हूँ।

भिडू (बस से उतरते ही): क्या हाल है देल्ही का ? सब ठीक है ? चुनाव का बुखार कितना चढ़ा है। बेदी के तो दोनों हाथ में लड्डू है। जीत गई तो CM , हार गई तो फिरसे अपनी ही घर की Jailor. तूने गणतंत्र दिन की परेड देखी थी ? मोदी – ओबामा को देखा था ?

जब वी मेट!
जब वी मेट!

वो अपना बल्लू है ना ! वो तो पहचान ही नहीं सका। बोल रहा था यह कौन ओबामाजी के पास में बैठा है काले चश्मे पहनकर ? मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया है क्या ? मैं बोला : यह तो अपना मोदी है। मोतिया वोतिया कुछ नहीं हुआ है , ओबामा के सामने स्टाइल मार रहा है। देशी बॉय। अपने भाषण में ओबामाजी को भी “बाराक बाराक” कह के बोल रहा था , मानो अपने गॉव का लंगोटिया यार हो। मुझे तो बिलकुल अच्छा नहीं लगा,सुनने में ही अखरता है , थोड़ी तमीज से ही बुलाना चाहिए। हम इतने ताकतवर नहीं हुए की अमेरिका के जुत्ते में अपना हाथ भी डाल सके। आदर से ही सम्बोधन करना चाहिए। दोनों अकेले में भले ही आपस में दोस्ती में “मोदु मोदु , ओबामु ओबामु “ कहकर बुलाये। हम अपने बच्चो को भी “आप” कहके बुलाते है , ताकि वो बड़ा होकर दूसरोंका आदर करना सिखें। मुझे तो लगता है , चाय बनाते बनाते प्राइवेट में ओबामाजी की परमिशन लेली होगी। जरूर चाय में कुछ काला है ! दोनों अकेले ही थे। सेटिंग में तो मास्टरी है ही। इंडियावालों पर और पडोशी देशो पर भी थोड़ा इम्प्रैशन जम जाता है कि भई दोनों में दोस्ताना है।

chaay
चाय पे खर्चा

मैं: ब्रेक लगा भिडू! तू यार शुरू हो जाता है तो फिर साँस भी नहीं लेने देता। तुझे मालूम है , मोदीजी ने कहा : इंडिया और अमेरिका में समानता है , दोनों ही देश के मुखिया साधारण परिवार से है। दोनों ही हनुमान भक्त है। दोनों ही रात को जागते है। वगेरह वगेरह।

भिडू (भड़का): क्या खाक समानता है। अमरीका सालों से ही नंबर 1 पर है। ऐसी तुलना होती है क्या ? कहाँ राजा भोज कहाँ फेंकुअलीदाऊद को तो पकड़ नहीं सकते, अमेरिका ओसामा को मार के बैठा है। कहाँ अमेरिका कहाँ इंडिया ! कहाँ साफसुथरा अमेरिका कहाँ अपना इंडिया। पहले ” स्वच्छ भारत अभियान ” तो पूरा करो। कहाँ अमेरिका का शिष्टाचार कहाँ अपना भ्रष्टाचार। अमेरिका में लोग पटरियोंपे नहीं निमटते। दोनों हनुमानजी के भक्त होने से दोनों देश की समृद्धि भी बराबर हो गई क्या ? हनुमान भक्त तो मनोजकुमार भी है ,कौन सा तीर मार लिया ? शिवजी के भक्त तो आडवाणी भी थे और मोदी भी। दोनों ही सोमनाथ महादेव के चक्कर काटा करते थे। फिर ? रही देर रात काम करने की बात। रातोंको ऊल्लूकी तरह जागने से सब ठीक हो जायेगा क्या ? गोरखा भी पूरी रात जागता रहता है। वह तो अपना अपना काम है भाई ! खुद ही तो बोलता था, आप लोग वोट देकर सो जाना , मैं जागता रहूँगा। और देर रात तक बेचारे परीक्षार्थी भी जागा करते है। सब के सब पास हो जाते है क्या ? अपना पप्पू पास हो गया सो अच्छी बात है।

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Vishnu Tibdewala
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Delightful but thoughtful sarcasm. ( Truth is Truth even if no one believes it )

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