Indian Neta herding sheep
कविता

लेफ्ट राईट सेण्टर: ये नेताओं के भक्त आखिर चाहते क्या हैं?

December 17, 2016 velawrites 0

भाजपा: भक्तों की पार्टी- ये भक्त जो म्हारी गली हांडते है, मन्ने गलियाते हैं, लताड़ते हैं। दूर नहीं जाते, बस कोसते जाते हैं। सोचता हूँ कि आखिर ये क्या चाहते हैं? नफरत है मुझसे जो, तो दूर […]

narendra modi fenking
कविता

कविता: मुझे मोदी का लॉलीपॉप जच गया !

December 9, 2016 velawrites 0

काले धन वालों का काला धन सफ़ेद हो गया, जिनका सफ़ेद था, खड़े खड़े उनका बुरा हाल हो गया। भाजपा का चंदा, एलान-इ-जंग से पहले ज़मीनो में नप गया, बाकी मोदी समर्थको को मोदी का लॉलीपोप […]

India Note ban Demonetization Note Can for snacks
कविता

नोटबंदी पर एक कविता

December 3, 2016 Kumar Keshav 0

चाहे हो वो बैंक कोई, या हो कोई एटीएम, मिलेगी या तो लाइन लंबी, या मिलेंगे ना रकम, चेक की बत्ती बना हम, कान अपना खुजायेंगे, पर खाते में पैसे रहें फिर भी निकाल न […]

पहचान कौन???
कविता

एक ‘नेता’ के मन की आवाज़: पहचान कौन?

November 18, 2016 velawrites 0

खुल्ले पैसे का अकाल पड़ रहा है, जैसे चुनाव खतरे में पड़ रहा है, वैसे ही भाई भतीजावाद में पार्टी का हाल बुरा है। गोदाम में पड़े झोले में कल तक थे जो नोट, उनका […]

Pehchan Kaun
कविता

कविता: पहचान कौन!! किसपे लिखी गयी है ये कविता?

September 27, 2016 velawrites 0

(क्या आप पहचान सकते हैं कि जिसका चरित्रार्थ नीचे की कविता में हुआ है, वो शख़्स कौन है? यदि आपका जवाब हाँ है तो Comments में लिखिये, और तो और- शेयर करना तो बिलकुल मुफ्त है।) बात खाज […]

Narendra Modi and Nawaz Sharif
कविता

कविता: ये सरकार नहीं, ये जुमलेबाजों की फ़ौज है!

उन वायदों क्या हुआ ? उन इरादों क्या हुआ ? क्यों 56 इंच नदारद है ? उन बड़बोलों का क्या हुआ ? क्यों आज हो मुह छुपाये बैठे, क्यों आज हो मुह छुपाये बैठे , कहाँ […]

Arvind Kejriwal Coughing - Khansi
कविता

॥ केजरीवाल चालीसा ॥

September 9, 2016 velawrites 1

काल से अनंतकाल तक, नभ से भूताल तक, सन्नाटे से भूचाल तक, हर उठे सवाल तक, ये खाली बजता थाल है, हां ये अपना केजरीवाल है। उठाये सवाल दुसरे के छीकने तक पे, सूखा बताये […]

Narendra Modi surveying Flood plains, PTI goofs up
कविता

मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है!

May 24, 2016 Kumar Keshav 0

देखो आसमां में काका, का पुष्पक उड़ रहा है, काका के जहाज का, इंजन हरदम चल रहा है, ‘अच्छे दिनों’ का कच्चा चिट्ठा, अब खुल रहा है, गरीब को थाली में, दाल नहीं मिल रहा […]

कविता

दिल से: मैं कोसता हूँ उस टेक्नोलॉजी को…

April 26, 2016 Roohulwa 0

तुम्हारे ‘व्हाट्सएप्प’ प्रोफाईल पे घूमना एक लफंगे जैसा एहसास कराता है मुझे.. दिन में सैकड़ों बार तुम्हारे ‘प्रोफाईल पिक्चर’ को गहरी साँसे ले कर देखता हूँ.. गहरी साँसे ? हाँ, उन तस्वीरों को देख कर […]

उफ्फ! कैसे-कैसे लोग हैं, मज़ाक को सीरियसली ले लेते हैं!
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कविता: विकास हुआ है, विकास हुआ है!

February 23, 2016 Jabra 0

विकास हुआ है, विकास हुआ है! ये तो पता नहीं क्या हुआ है, पर कुछ तो हुआ है मेरे दोस्त अक्सर ये कहा करते है इसलिए मुझे ये कयास हुआ है विकास हुआ है, विकास […]

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कविता: शख़्स जो ये है मुझमें कहीं

January 11, 2016 Kanwali 0

शख़्स जो ये है मुझमें कहीं, आजकल मेरी शख्सियत से सवाल करने लगा है। महज मिजाज नहीं पूछता मुझसे, आजकल दुनिया भर का बवाल करने लगा है। ज़ेहन में इसके जो है यही जानता है, […]