अखिल भारतीय व्यंग्य संगठन ने सनी लियॉन को अगला प्रधानमंत्री बनाने की मांग की

देश में एक ही महिला है जिसके समर्थक उसका मज़ाक बनाने पर बुरा नहीं मानेंगे. आप किसी भी लेवल तक जा सकते हैं.

मुम्बई: आजकल हास्य-व्यंग्य लिखना काफी फायदे का सौदा हो गया है. पहले बेरोजगार, बेकार लोगों को इससे गली मोहल्ले की चाय की दुकानों पर चाय खरीदने का जुगाड़ हो जाता था, अब तो वे लोग ‘अन्टिला’ वाला बंगला खरीदने का भी सपना देखने लगे हैं. पहले चाय-सुट्टे वाले उनको 5 रुपये तक उधार देते था, आजकल वो 15 रुपए तक देने लगे हैं.

Sunny Leone Politics
लियॉन को वोट दियो रे!

इतना पैसा कमाने की खबर फैलने पे दूसरों की सुलगनी तो थी ही. और हो भी क्यों न, ये लौंडे 5 रूपए प्रति दिन पर अपना दिन चला लेते हैं.

जब ये मोदी पर कोई आर्टिकल लिखते हैं, तो भक्त कमेंट बॉक्स में गालियाँ भर-भर के गंध मचा देते हैं.

जब ये केजरीवाल पे कोई आर्टिकल लिखते हैं, तो आपियंस चिल्ल-पो मचा देते हैं. कहने कि ज़रुरत नहीं कि बिना किसी लॉजिक के.

जब ये कांग्रेस पे कोई आर्टिकल लिखते हैं, कांग्रेसी चिल्लाने लगते हैं कि जो पहले से सच हो, उसे व्यंग्य की तरह नहीं छापा जाना चाहिए. खैर, इनकी बात छोड़ते हैं.

इन सब चकल्लस से फ्रस्टेट होकर, और ये सोचते हुए कि किसी मशहूर हस्ती पे व्यंग्य कसना मने ‘आ बैल मुझे मार’, व्यंग्यकारों के एसोसिएशन ने अगले आम चुनावों में एक निर्दलीय का समर्थन करने का फैसला किया है. कारण खोद-खोदकर पूछने पर बताया गया कि देश में एक ही महिला है जिसके समर्थक उसका मज़ाक बनाने पर बुरा नहीं मानेंगे. आप किसी भी लेवल तक जा सकते हैं, और उनका टॉलरेंस लेवल किसी भी नेता, अभिनेता या बिजनेसमैन से कहीं ज़्यादा है. उनसे अच्छा रोल मॉडल तो कोई हो ही नहीं सकता.

अब वो समय आ गया है जब भारत अगला बड़ा कदम उठाये और सनी लियॉन को प्रधानमन्त्री पद पर नियुक्त करे, जिससे हमारा कुछ भला हो सके.

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
velawrites
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वेला तेरी तरह। अब तू माने या ना माने दोस्त मेरे , मैंने तो तुझे वेला माना। http://velawrites.in/

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