नोटबंदी याने मोदूराम ब्रदर्स (लांड्री और ड्राई क्लीनर्स) की कथा

सत्ता में बैठे बैठे ढाई साल बीत गए। पर विकास पैदा नहीं कर सके। तब सोचा क्यों ना देश की आर्थिक व्यवस्था को ही "धो" डाला जाये। मैली कुचैली हुई पड़ी करेंसी को रामदेवजी के बताये साबुन से धो कर ड्राई क्लीन करके बदले में करारे-करारे नए नोट देश की जनता को लौटाया जाये।

वो पिछले ७ नवम्बर २०१६ की रात थी। मोदूराम* और जोटूराम बालकनी में बैठे चाय पी रहे थे।

मोदूराम :- सत्ता में बैठे बैठे ढाई साल बीत गए। पर विकास पैदा नहीं कर सके। अब सोचता हूँ ! क्यों ना देश की आर्थिक व्यवस्था को ही “धो” डाला जाये। मैली कुचैली हुई पड़ी करेंसी को रामदेव जी के बताये साबुन से धो कर ड्राई क्लीन करके बदले में करारे-करारे नए नोट देश की जनता को लौटाया जाये।

India Demonetization Police Beating queue with Lathi
धुलाई का ट्रेलर ! (सौ: एफ़पी)

जोटूराम :- बहुत बढ़िया “शौचा” है। अब और मत “शौचो”। एलान ही कर दो। आगे फिर देख लेंगे।

अत: ८ नवम्बर २०१६ को टेलीविज़न पर एलान हो गया।

“मेरे १२५ करोड़ भाइयो और बहनो ! मैंने बहुत “शौच” करके यह निर्णय लिया है कि कल ९ नवम्बर से ३० दिसम्बर २०१६ तक आपके घर में जितने भी पुराने कपड़े हैं वो आप जाकर अपनी अपनी बैंको के “वाशिंग मशीन” में जाकर डाल दें। मैं आपके कपड़े धोकर नए कपडे धीरे-धीरे लौटा दूंगा। आपको धुले हुए कपड़े उन्हीं बैंको से और बैंको के नज़दीक में रख्खे ATM से अपने ATM कार्ड दिखाकर वापस मिल जायेंगे। और हाँ ! इतना याद रख्खे कि ३० दिसम्बर २०१६ के बाद उनकी लौंड़्री के Logo स्टीकर वाला कपडा पहनकर ही घर से बाहर निकल सकोगे।”

बस ! फिर क्या था ! जनता तो ख़ुशी से पागल हुई, और थोड़ी-थोड़ी घबराई हुई सी अपने घर के सारे कपडे (उप वस्त्र को छोड़कर ) लाइन में खड़े रह कर वाशिंग मशीन में डाल आई। सारी वाशिंग मशीनें चालू हो गई। कुछ वाशिंग मशीनें ज्यादा “एडवांस” थी। उसमे कपडे धुलकर, ड्राई होकर, प्रेस होकर निकलने लगे। अब जिन सूट-बूट वालों के ढेर सारे और ज्यादा महेंगे कपडे सूट- जोधपुरी सूट- नेता-ब्रांड चूड़ीदार कुर्ते थे, वो लोग पिछले दरवज्जे से ही अपने स्टार्च लगाए हुए नये कपडे ले कर निकल लिए। बेचारी लाइन में खडी जनता को अपने कपडों के बदले में किसी को सिर्फ शर्ट मिला किसी को सिर्फ पेंट, और किसी को सिर्फ साड़ी तो किसी को सिर्फ घाघरा।

अब हालत ऐसी हो गई है कि जनता बेचारी चड्डी-बनियान-घाघरा- ब्लाउज़ पहने महीनो से अपने बाकी के नए कपड़ो का इंतज़ार किये रोज़ रोज़ लाइन में खड़ी रहती है। जिसने १०- १० जोड़ी कपडे डाले थे, उनको मुश्किल से १ जोड़ी कपडा हाथ लगा है। अब तो १-२ जोड़ी धोने डालने वालों को पूछताछ करके परेशान किया जा रहा है कि भाई इतने दिन क्यों लगा दी ? वो बेचारा खुलासा करता है कि भैया ! तुम्हारे सेठ ने ही ३० दिसम्बर २०१६ तक का वक़्त दिया था, अब हमें क्यों धमका रहे हो। लेकिन सुनता कौन है ?

आज एक तरफ आम जनता उप वस्त्र पहनकर लाइन में खड़ी है, और उस तरफ Logo स्टीकर छापने वाला Logo स्टीकर छापने में लगा है.
और मोदूराम और जोटूराम मज़े से वाशिंग मशीन में पड़े पुराने कपड़ों से हुए मुनाफे का हिसाब लगा रहे हैं।

*नोट: मारवाड़ी भाषा में “मोदूराम” का मतलब “आत्ममुग्ध व्यक्ति” होता है।

Vishnu Tibdewala

Vishnu Tibdewala

Senior Satirist
हास्य हेतु व्यंग्य। कटाक्ष ना समझे। कटाक्ष को व्यंग्य ना समझे।
Vishnu Tibdewala

@VTibdewala

delightful but thoughtful sarcasm,satire on political happenings. हास्य हेतु व्यंग्य। कटाक्ष ना समझे। कटाक्ष को व्यंग्य ना समझे। भारत देश की जय
#INDvENG एक छौर से धोनी को युवराज को होंसला देते देख योगराज जी की आँखे 👀👀 डबडबा गई होगी। - 10 hours ago
Vishnu Tibdewala

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