​आशाराम की सरकार से गुहार, उन्हें भी नोट बदलने का मौका दिया जाए

आशाराम ने अभी तक अपने पुराने नोटों को बैंक में जमा नही करवाया है। इसके पीछे कारण है- अपने अच्छे कर्मों का फल भोगने के लिए वो जेल की हवा खा रहे हैं।

नए नियम के मुताबिक लोग 31 दिसंबर तक ही बैंक में अपने पुराने नोटों को जमा करवा सकेंगे। जो लोग भीड़ छंटने का इंतज़ार कर रहे थे वो लोग अब आराम से बैंक में जा कर अपने पुराने नोट जमा करवा रहे हैं।

लेकिन एक व्यक्ति है जिसने अभी तक अपने पुराने नोटों को बैंक में जमा नही करवाया है।

Asaram Bapu Ji just after undergoing potency test.
नोटबंदी की खबर सुनकर अपनी प्रतिक्रिया देते ‘बापूजी’.

आशाराम ने अभी तक अपने पुराने नोटों को बैंक में जमा नही करवाया है। इसके पीछे कारण है- अपने अच्छे कर्मों का फल भोगने के लिए वो जेल की हवा खा रहे हैं। हालांकि उनके उच्च कोटि के समर्थक उनके नाम की माला जपते हुए 25 दिसम्बर को तुसली दिवस बनाने की भी कोशिश करते हैं।

आशाराम को भी नोटबंदी से तकलीफ हुयी है, इसका तब पता चला जब आशाराम ने सरकार को पत्र लिख कर एक माँग की।

आशाराम ने सरकार से कहा कि नोटबंदी से उन्हें बहुत तकलीफ हुयी है, और जैसे-जैसे नोट जमा कराने की तारीख पास आते जा रही है उनका ब्लड प्रेशर, शुगर और बहुत सी दूसरी बिमारीयां बढ़ती जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि उनके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए, वो भी इसी देश के निवासी हैं। उन्होंने देश की भलाई में भी बहुत योगदान दिया है। देश के बच्चों को जवान बनने की प्रेरणा दी है, और कामसूत्र को भी उन्होंने फैलाया है।

अतः सरकार से निवेदन है कि ३१ जनवरी पहले उन्हें रिहा कर दिया जाए, ताकि वो भी अपने नोट को बदल सकें।

सरकार के तरफ से इस बात पर कोई भी मंत्री बोलने से बच रहा है। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जल्द आशाराम को जमानत मिल सकती है, ताकि वो अपने पुराने नोट को बदलवा सकें।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Shubham
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