समाजवादी पार्टी में ऐसे हो रहा है UP चुनाव के लिए टिकट वितरण !

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी में टिकट के बंटवारे के लिए उठापटक शुरू हो गयी है। कैसे हो रहा है बंटवारा, हम बताये दिए देते हैं!

यू०पी० के चुनाव में समाज के बीच से निकल कर एक परिवार बनाने वाली समाजवादी पार्टी में चुनाव से पूर्व टिकट वितरण हो रहे हैं, जिसके लिए मुलायम जी को कहा गया है कि वो टिकट वितरण के बाद ही कुछ कहें। शिवपाल ग़ुस्से में पार्टी दफ़्तर में घुसते हैं, और नेताजी पर बरस जाते हैं।

"Why do I always have to make pegs?" asked a visibly angry Akhilesh.
बाप-बेटे टिकट के बंटवारे पर वार्तालाप करते हुए.

शिवपाल: भैया, क्या यही मेरी सेवा तपस्या का फल है? आपने मुझे पार्टी का अध्यक्ष बनाया, पर अधिकार मेरे भतीजे को दिया। ऐसा क्यों! ऐसा क्यों? ऐसा क्यों?

मुलायम: बस भी कर पागल, रुलाएगा क्या? तू क्या चाहता है, ना पार्टी रहे ना मैं। अखिलेश पर पावर है, पैसा है, सत्ता है, और हमारे पास क्या है?

शिवपाल: भैया हमारे पास अमर सिंह हैं।

अखिलेश: पिताजी, अगर आप दोनो का विचार विमर्श हो गया तो टिकट के लिए लाइन लगी है। बाँटना शुरू करूँ?

पहला टिकट आज़म खान के लिए, क्योंकि वो मुस्लिम वोट दिलाएँगे। मुझे मुस्लिम बनने की प्रक्रिया समझाएँगे।
दूसरा टिकट मैं छोटे को देना चाहता हूँ, वो ही मेरे लिए प्रचार करेगा।
तीसरा टिकट आपकी बहू डिम्पल के लिए, उसका मेरी पार्टी पर आधा हक़ है।

मुलायम: बेटा, डिम्पल को पहले जिताने के लिए उस एक आदमी को मरवाना पड़ा था, तभी वो जीत पायी थी। इस बार तो बहुत लोग होंगे।

शिवपाल: भैया हम बता रहे है। हम टिकट बाटूँगा, क्योंकि हमने ही लालू के साथ रिश्ता करवाया है। अगर आप हमें टिकट नहीं बाटने दिए तो हम लालू जी को मना कर देंगे समर्थन के लिए। अमर सिंह आपका जो सी॰बी॰आई॰ वाला केस है, नहीं लड़ेंगे।

मुलायम: शिवपाल पगले, तुम अपने भाई को ब्लैक्मेल कर रहे हो? तुमसे ये उम्मीद नहीं थी।

शिवपाल: अरे भाई, हमें जाना है या रुकना है? समर्थक हल्ला काट रहे हैं।

ये बहस चालू होती है। तभी अजीत सिंह जी आते हैं।

अजीत सिंह: देखिए मुझे कोई मतलब नहीं है कौन क्या कर रहा है। टिकट किसी को भी मिले, पर मुख्यमंत्री मेरा बेटा जयंत ही बनेगा। इस बार मैंने उसे वादा किया है। हम और पार्टी नहीं बदलेंगे।

इतना सुनने के बाद से मुलायम सिंह अभी तक होश में नहीं आए हैं। खबर लिखे जाने तक अखिलेश और शिवपाल लड़ने में व्यस्त थे।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Deepti Singh
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| ब्लॉगर| लेखक| दिवास्वप्नदृष्टा | पुस्तक-प्रेमी | ड्रीम-कैचर| श्रोता | घुमक्कड़| मूडी|

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