नोटबंदी ने शादियों का कर डाला ये हाल, देख लीजिये

नोट बंदी क्या हुई मानो शादियों पर जैसे कहर ही टूट गया। सारस्वत और शर्मा - दो परिवार इस समस्या से कैसे जूझ रहे हैं, हम आपको बताये देते हैं।

सुनते हो कहाँ गए, टी.वी. देखा आपने? वैसे तो पूरा दिन टी.वी. देखते रहते हो, अख़बार में घुसे रहते हो। क्या देखते हो जब कुछ पता नहीं रहता।

अरे! भाग्यवान क्यों चिल्ला रही हो। सारस्वत जी अंदर से पूछते हैं। आख़िर ऐसा क्या हो गया जो तुम मेरे ऊपर इतना भड़क रही हो। तुम तो शर्मा जी के यहाँ गयीं थी ना। शर्मा जी ने लड़का न्यूज़ रिपोर्टर बताया है क्या? सारस्वत जी ने पत्नी से चुटकी लेते हुए कहा।

आप बस रहने दीजिए। पता नहीं कौन से कर्म किए जो मुझे आप जैसा पति मिला। जिसे ना दुनिया का पता है ना घर का।

ऐसे ही मुझे कोसती रहोगी या कुछ बताओगी भी।

क्या बताऊँ? अब हमारी बेटी की शादी नहीं होगी। वैसे ही लड़का नहीं मिल रहा था। इस प्रधानमंत्री को भी मेरी बेटी की शादी से ही परेशानी थी, जो इसने ऐसा कर दिया। (ग़ुस्से से टी.वी. को चालू करते हुए)।

सारस्वत जी- अरे! अब प्रधानमंत्री ने कौन सा तुम्हें तुम्हारी बेटी की शादी करने से रोक दिया जो अब पति से प्रधानमंत्री पर पहुँच गयी।

Demonetization Marriage Shagun by Swipe Machine
नोटों पर लगे बैन ने शादियों में दूल्हा-दुल्हन के हाथों में स्वाइप मशीन पकड़ा दीं!

तभी टी.वी.में एक रिपोर्टर चिल्लाते हुए कहता है- प्रधानमंत्री का बड़ा फ़ैसला कालेधन के ख़िलाफ़। अब से आपके 500₹ और 1000₹ के नोट मात्र काग़ज़ हो गए।

हाय! शर्माजी सही बोल रहे थे। अब क्या होगा हमारा। हमारी बेटी की शादी का।

सारस्वत जी- पत्नी क्यों इतना परेशान हो रही है। पूरी बात तो सुन ले, कालेधन के ख़िलाफ़ फ़ैसला लिया है। कितने लोग हैं जो टैक्स नहीं देते हैं। पैसे को छुपा कर रखते हैं। अब उनका पैसा बर्बाद हो गया।

आप चुप हो जाइए। तुम्हें तो पहले भी कौन-सा फ़र्क़ पड़ता था। मैंने कहा था कर दो लड़की की शादी, पर नहीं, तुम्हें तो मेरी सुननी नहीं थी। अब क्या होगा भगवान मेरी लड़की का (रोते हुए)!

सारस्वतजी- भाग्यवान तू तो ऐसे रो रही हैं जैसे तूने ही सारा कालाधन छुपा रखा था। कौन सी लड़की की शादी के लिए रो रही है। पहले लड़का तो ढूँढ ले या फिर शर्मा जी ने बता दिया और तुमने रिश्ता भी पक्का कर दिया। (हँसते हुए)

हँस लो। तुम कौन सा घर चलाते हो। कैसे पैसे बचाए जाते हैं क्या जानते हो तुम। तुम तो ख़ुश होगे, अब लड़का नहीं देखना होगा। तुम्हें कौन सा कोई कुछ कहता है। सब्ज़ी वाले से लेकर दूध वाले भी सब मुझसे पूछते हैं। कॉलोनी वाले भी मुझसे ही सवाल करते हैं। पैसे बचा रहे हो जो लड़की की शादी नहीं कर रहे।

सारस्वतजी- भाग्यवान पत्नी से तो भगवान भी नहीं जीत सकता। मुझे तो तू खाना देने वाली अन्नपूर्णा देवी है। तू बता तूने कितने रुपए मुझसे छुपाकर रखे हैं। बता दे। मैं टैक्स भरता हूँ, सब ठीक कर देंगे।

रुपए, कौनसे रुपए? आप से घर से कुछ बचे तो बचाऊँ ना। मेरे पास कोई काला धन नहीं है। मुझे तो मेरी बेटी की चिंता हैं। अब कैसे करेंगे। वैसे तुम्हें क्या लगता है, ये सब बंद हो जाएगा ना।

सारस्वत जी (हँसते हुए)- अब भी बता दे। कल को रोना मत अगर तेरा छुपा कालाधन बर्बाद हो जाए। शादी के लिए आख़िर कितना पैसा दबा रखा था। बता दे, अब तो भारत की सभी पत्नियों का पति से छुपा कालाधन निकलेगा।

तभी दरवाज़े पर दस्तक सुनायी देती हैं……सारस्वत जी दरवाज़ा खोलते हैं।

श्रीमती शर्मा, आप यहाँ कैसे? इतनी परेशान क्यों हैं।

श्रीमती शर्मा- भाई साहब, आप जल्दी चलिए मेरे साथ, बंटी के पापा को कुछ हो गया है।

सुनती हो…मैं शर्मा जी के यहाँ जा रहा हूँ।

सारस्वत जी, रुकिए मैं भी चलतीं हूँ।

(शर्माजी के घर) सारस्वतजी- शर्माजी क्या हो गया।हॉस्पिटल चलें क्या? आप ऐसे कैसे गिर पड़े। आप ठीक तो हैं। अभी कुछ देर पहले तो आप ठीक थे।
शर्माजी- क्या कहूँ आपको। बेटी की शादी की है 15 दिन पहले। अब ससुराल से फ़ोन आया था। उन्हें दहेज का पैसा वापस करना है।

सारस्वतजी- ऐसा क्यों? क्या हो गया। वो तो ख़ुश थे, फिर क्या हुआ।

शर्माजी- उन्हें नए नोट चाहिए अब।

सारस्वतजी- आप चिंता मत करो। बस ठीक होगा, मिलकर कुछ सोचेंगे। आप अभी आराम करो। कल सुबहा बात करेंगे। चलो श्रीमती घर चलते हैं।

(सारस्वतजी के घर) क्या कह रहे थे शर्मा जी आप से? श्रीमती जी ने जिज्ञासा से सारस्वत जी से पूछा।

सारस्वतजी- उन्होंने अपनी बेटी की जो शादी की थी उसके बारे में ही बता रहे थे।

श्रीमती जी तपाक से बोलती हैं। देखा, मैंने कहा था ना शादी के लिए लड़का देख लो। शर्मा जी तो गंगा जी नहा गए। पहले ही शादी कर दी बेटी की। अब मेरी बेटी की शादी कभी ना हो पाएगी।

सारस्वतजी- भाग्यवान! कभी तो कुछ सोचकर अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके बोला करो। पूरी बात तो सुन लो। शर्मा जी बेचारे परेशान थे। लड़की की शादी में जो दहेज दिया था, उसे ससुराल वाले वापस कर रहे हैं।

वाह! सारस्वत जी, फिर तो उन्हें ख़ुश होना चाहिए, श्रीमती जी ने बड़े ख़ुशी के साथ कहा।

सारस्वतजी- वो पुराने के बदले नए नोट माँग रहे हैं।इतनी बड़ी रक़म है जिसे अब शर्माजी दिखा भी नहीं सकते।

सुनते हो? श्रीमती जी बड़े धीरे से कहती हैं- आप आराम से लड़का ढूँढ लेना, आख़िर हमारी बेटी है, कोई जल्दी नहीं है।

वैसे सारस्वत जी क्या पैसे सच में काग़ज़ हो जाएँगे। अगर जमा नहीं करवाए तो।

सारस्वतजी- तुम्हें क्या लग रहा है, प्रधानमंत्री ने पीकर निर्देश दे दिया? सुबहा उठकर मना कर देगा।

श्रीमती- क्या सच में ऐसा हो सकता है?

सारस्वतजी- तुम पागल औरत हो।

श्रीमती- अच्छा सुनिए। मेरे पास कुछ 2 लाख रुपए हैं। उन्हें जमा करा दीजिए।

सारस्वत जी- तुमने तो कहा था कोई पैसा नहीं बचता, अब कहाँ से आए ये पैसे। कब से छुपा रही थी?

श्रीमती- आप पैसे जमा करवाओगे या नहीं। बेटी की शादी नहीं करनी थी क्या? सब तुम्हें बता दिया करूँ?

सारस्वतजी- अरे! भाग्यवान…ग़ुस्सा मत करो।तुम्हारा पैसा भी जमा कर देंगे। तुम्हारी लड़की के लिए लड़का भी ढूँढ लेंगे।

(जनहित में सूचना जारी अब कैसे मिलेगा लड़का, प्रधानमंत्री जी ने नोटबंदी कर डाली।)

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Deepti Singh
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