राष्ट्रगान बजते वक्त सिनेमा हॉल के वॉशरूम में बैठे कल्लन की हुई कुटाई

देशभक्ति में डी लिट् विशेषज्ञ बताते हैं कि राष्ट्रगान बजते वक्त खड़े होने से देशभक्ति का संचार पदनख से लेकर शिख तक होता है।

देश के कई सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने का प्रचलन प्रारंभ हुआ है। और राष्ट्रगान बजे तो उसके सम्मान में खड़ा भी होना पड़ता है। देशभक्ति में डी लिट् विशेषज्ञ बताते हैं कि राष्ट्रगान बजते वक्त खड़े होने से देशभक्ति का संचार पदनख से लेकर शिख तक होता है। ऐसे में जो लोग राष्ट्रगान बजते वक़्त कारण-अकारण बैठे रहते हैं, उनके पूरे शरीर में देशभक्ति का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता। इस तरह वे पूरे देशभक्त नहीं बन पाते। इसलिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान वादन के वक़्त कोई बैठा रहे तो उसे विशुद्ध देशभक्त न मानते हुए उसे कूटने की प्रथा चली है। देशभक्ति के इसी दंश का ताजा शिकार हुए हैं तीखी मिर्ची के एक सुधी पाठक कल्लन कुमार पांडे। उन्होंने अपना अनुभव साझा किया है हमारे साथ।

National anthem in movie theatre
देशभक्ति का शॉर्टकट!

हुआ यूँ कि शेरपुर निवासी कल्लन कुमार पांडे कल “सात उचक्के” फिल्म देखने गए। और कुछ उचक्कों, जो कुछ देर पहले ही ‘भारत माता की जय’ बोलकर देशभक्त बने थे,  ने कल्लन जी को कूट दिया। ये घटना उस वक़्त घटी जब कल्लन जी फिल्म शुरू होने से ठीक पहले सिनेमा हॉल के शौचालय में बैठे थे।

कल्लन जी ने हमें बताया कि “हॉल में घुसते-घुसते ही मुझे बड़ी जोर की दीर्घशंका आयी, तो (कालांतर में ये मेरे लिए आफत साबित होगी इस बात से बिलकुल अनभिज्ञ) मैंने पहले शंका-समाधान करना मुनासिब समझा। मैं कमोड पर विराजमान होकर हल्का होने का प्रयास कर ही रहा था कि कुछ लोग वॉशरूम का दरवाजा तोड़कर अंदर आ गए और चिल्लाना शुरू कर दिया। वे जोर-जोर से ये बोलकर मुझपे बरसने लगे कि ‘अंदर ऑडिटोरियम में राष्ट्रगान बज रहा है और तू यहाँ बैठा है ? खड़ा हो गद्दार !’ इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता और धोकऱ खड़ा हो पाता, उन्होंने मुझे धो दिया। लेटा-लेटाकर पेला मुझे। ये सोचकर कि अनुपम खेर फिल्म में होने के साथ-साथ देशभक्त भी हैं, मैंने उनकी कसम भी दी। फिर भी उन्होंने मेरी एक न सुनी और लात-घूँसों से मेरा सत्कार कर दिया। रियल लाइफ उचक्कों से साक्षात्कार हो जाने के बाद “सात उचक्के” देखने का पुरुषार्थ मेरे अंदर शेष नहीं रहा। सो रास्ते भर मन ही मन राष्ट्रगान का पाठ करते हुए देशभक्ति की नयी सीख लिए मैं वापस घर आ गया।”

Discussion

comments

डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Kumar Keshav
About Kumar Keshav 56 Articles
आजादीपसंद, स्वच्छन्द, आरामतलबी, अमितभाषी

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*


This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.