राहुल गाँधी ने खाट पे चर्चा में किया राशन कार्ड बनाने का वादा, उत्तर प्रदेश में सनसनी के बीच भारी मात्रा में पलायन

आखिर ऐसा क्या था कि राशन कार्ड बनाने के वादे ने लोगों के अंदर खौफ पैदा कर दिया? कहीं ये दिल्ली की किसी घटना का असर तो नहीं? जानने के लिए पढ़ें।

लखनऊ: ‘खाट पे चर्चा’ बीते दिनों भारी भीड़ जुटाने में कामयाब रही। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओ के लिए ये उत्साहित करने वाली बात थी। सुनने में तो यहाँ तक आया है कि इस भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी थे जो कांग्रेस कार्यकर्ता ही नहीं थे।

Khat Pe Charcha - People carrying cots on their heads
‘खाट पे चर्चा’ से जान बचकर भागते लोग।

कांग्रेस इस बात से इसलिए भी उत्साहित है कि इस बार शायद उनके उम्मीदवार अपनी ज़मानत बचाने में कामयाब होंगे। प्रशांत किशोर की योजनाएं कामयाब हो रही हैं, ‘खाट पे चर्चा’ एक कामयाब योजना जो साबित हुई। हालांकि ये और बात है कि राहुल गाँधी की ‘बातों’ से ज्यादा लोगो को ‘खाटों’ में रूचि है। पर इतना तो हम नज़रअंदाज़ कर ही सकते हैं। बुद्धिजीवियों का एक कुशल दल प्रशांत किशोर ने राहुल गाँधी के साथ रख छोड़ा है ताकि जो गलतियां उन्होंने इतिहास में की, वो दोहराई न जाये।

जो उम्मीदवार कांग्रेस के उम्मीदवार बनने की जगह निर्दलीय लड़ने का विचार बना रहे थे, वो भी लौट रहे थे। टिकट की कीमत वापस हज़ारो में पहुच चुकी थी। सब कुछ अच्छा चल रहा था, पर तभी राहुल गाँधी ने फिर दिमाग लगा कर कुछ ऐसा बोला कि भारी पलायन की खबरें सुनने में आ रही हैं। लोग अब ‘खाट पे चर्चा’ नहीं कर रहे, और खाट उठाने का सिलसिला भी थम चुका है।

मामला दो दिन पहले का है, जब एक ‘खाट पे चर्चा’ के दौरान उनसे पुछा गया कि यहाँ किसानों को अनाज तक नहीं मिल पा रहा है, फसलें ख़राब होने पर घर चलाना बहुत मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कांग्रेस कैसे इस समस्या से निजात दिलाएगी। राहुल गाँधी फिर अपने चित परिचित अंदाज़ में आये, और जवाब (बिना अपने दल की राय लिए) दे डाला-

“मैं उत्तर प्रदेश की हर महिला का राशन कार्ड बनाऊंगा, घर जा-जाकर।” – राहुल गाँधी।

सुनने में आया कि राहुल के इस बयान के खबर में आते ही सनसनी फ़ैल गयी।  लोगो ने अपनी बीवियों को चुनाव तक के लिए राज्य से बाहर भेज दिया है। आजकल समलैंगिक रिश्तो में होती बढ़ोतरी को देखते हुए भारी संख्या में आदमियों के पलायन की खबरें भी आम हो रही हैं।

ऐसे ही एक जाते परिवार से हमारे संवाददाता ने बात की, तो उन्होंने बताया कि भूखे और बदहाल तो उन्होंने कर ही दिया था, उसपर इन्होंने राशन कार्ड बनाने का वादा कर के हमारे डर को और बढ़ा दिया है।

हमारे संवाददाता ने रा-गा से बात की तो उन्होंने बताया कि राशन कार्ड बनाना तो अच्छी बात है, पता नहीं क्यों लोग डर रहे हैं, तो पीछे से मार्ग-दर्शक मंडल के एक सदस्य ने कान में बोला कि-

 सर, किसी ज़माने में मुकेश का गाना- ‘आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ’ भी बेहतरीन समझा जाता था, पर अब इसके मायने बदल गए हैं।

राहुल गाँधी को तो समझ नहीं आया, और प्रशांत किशोर ने ये निर्देश जारी किये हैं कि जब तक उन्हें ये समझ नहीं आता, तब तक वो पोगो ही देखे, UP न जाएं।

(वेला के ब्लॉग पर यहाँ भी प्रकाशित)

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
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