न्यूज़ चैनल के सर्वे ने कांग्रेस को UP में दी 13 सीट, पार्टी कार्यकर्ताओं में ख़ुशी की लहर

सर्वे के नतीज़ों का दिन था। कांग्रेस दफ्तर में सन्नाटा था। अंदेशा था की दिल्ली दोहराई जाएगी। पर नतीज़ों में कुछ ऐसा था की कांग्रेस के खेमे में ख़ुशी की लहर फ़ैल गयी।

सर्वे के नतीज़ों का दिन था। कांग्रेस दफ्तर में सन्नाटा था। अंदेशा था की दिल्ली दोहराई जाएगी। पर नतीज़ों में कुछ ऐसा था की कांग्रेस के खेमे में ख़ुशी की लहर फ़ैल गयी। और फिर टीवी के एक म्यूट बटन से सन्नाटा फिर फैल गया।

कल देर रात तक कांग्रेस दफ्तर में सन्नाटा था। सबको अंदेशा था की दिल्ली दोहराई जाएगी। राहुल गाँधी को लगातार चॉक्लेट सिरप के ड्रिप्स चढ़ाये जा रहे थे। विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन सिंह उनपर लगातार निगरानी बनाये हुए थे। ध्यान बटाने के लिए लगातार पोगो चैनल चला  रखा था।

Sonia Gandhi and Rahul Gandhi
फोटो: ये म्यूट हटाने वाला बीजेपी का आदमी है, इससे पार्टी से निकालो।

बाहर के कमरो में बाकी सारे मौजूद थे।  शीला दिक्षित जी भी वही मौजूद थी।  जबसे कांग्रेस ने उन्हें मुख्य मंत्री का प्रत्याक्षी घोषित किया है, उनकी चिंताएं पहले से ध्वस्त हो चुके राजनितिक करियर को लेकर खाक में मिल चुकी है। उत्तर प्रदेश चुनाव में अगर दिल्ली सा हाल होता है तो उनका कार्य भार भी अजय माकन की तरह सिर्फ ऐसे प्रवक्ता का हो जायेगा जिसे न्यूज़ चैनल बहस के लिए बुलाता नहीं है और बुलाता  भी है तो सिर्फ बेइजत्ती  करने के लिए।

प्रशांत किशोर कैलकुलेटर लेकर बैठे थे। और वरिष्ठ सदस्य ध्यान से उनके कैलकुलेटर को देख रहे थे जैसे यही से चुनाव के नतीजे आने वाले है। कुल मिलकर 403 सीटो  के नतीजे जिसपर कांग्रेस के लोगो की पैनी नज़ारे लगी हुई थी।सोनिया जी ने टीवी न देखने  का मन बना लिया था। सूत्रों के हवाले से खबर मिली की ऐसा फैसला उन्होंने इसीलिए लिया क्योंकि ये एक हिंदी चैनल पर आने वाला था,  और वो लोग किसी भी बहस में कांग्रेस की माँ (इंदिरा गाँधी) -बहिन (प्रियंका गाँधी) का उल्लेख करके और बेइजत्ती करने लगते है। इसके इलावा उनकी हिंदी तो  पूरा हिंदुस्तान जनता ही है की कितनी मश-अल्लाह है।

Congress Sycophants
राहुल गांधी के कांग्रेसी चमचे उनको प्रभावित करने के लिए एक विशेष मुद्रा में.

कार्यक्रम की शुरुआत होते ही कमरे में घनघोर सन्नाटा  फ़ैल गया। सब दो टूक नज़रो से टीवी की और देखने लगे। पहले बीजेपी फिर सपा फिर बसपा का नंबर आया। सन्नाटा  अभी भी अपनी जगह बनाये था। अब नंबर कांग्रेस का था। सन्नाटे के बीच धड़कनो और सासो की आवाज़  सुनाई दे रही थी। ऐसे में संचालक ने एक विराम ले लिए विज्ञापन दिखाने के लिए। कोई एक शब्द नहीं बोला। प्रशांत ने कैलकुलेटर पे टाक टाक किया और पहली बार कमरे में आवाज़ सुनाई दी-

अभी १८ सीट बाकी है जो हम जीतने वाले है। कमरे में खी-खी सुनाई देने लगी।  पीछे से अहमद खान ने व्यंगात्मक सलीके से टिपण्णी की “बिना दल वाले भी बाकी है मेरे दोस्त”।

सन्नाटा फिर से पसर गया। कार्यक्रम शुरू हुआ। औपचारिक तौर पर सुनाई दिया कांग्रेस इस चुनाव में १३ सीट जीतेगी। प्रशांत किशोर अपने दोनों हाथ ऊपर उठा कर खड़े हो गए। एक विजेता की भांति उन्होंने वो शब्द बोले जिससे पूरा कमरे बधाइयों की आवाज़ों से भर गया

हम दिल्ली से अनंत गुना ज्यादा सीट जीतेगे जबकि बीजेपी सिर्फ ४० गुना। ये भारी जीत है हमारी और हार भाजपा की। गौरतलब है की दिल्ली में कांग्रेस कोई सीट नहीं जीती थी। खचाखच भरे कमरे में घडगड़ तालियां गूंजने लगी।

इतने में एक उत्साहित कार्यकर्ता ने टीवी का म्यूट ख़तम कर दिया। कार्यक्रम ख़तम हो रहा था और संचालक ने आखरी वाक्य बोला-

“इन् नतीज़ों में 10-15” सीटे ऊपर नीचे हो सकती है।

पूरा कमरा बस एक आदमी को घूर रहा था, वो प्रशांत किशोर नहीं थे वो वो शक्श थे जिन्होंने टीवी का म्यूट हटाया था।

(My Faking News पर और वेला के ब्लॉग पर यहाँ भी प्रकाशित।)

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
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