बरनोल को राष्ट्रिय मरहम क्यों धोषित किया जाना चाहिए? ये हैं 6 वजहें

तेरी जली न?, भक्त स्पॉटेड, आपिए, खानग्रेसी, चू*ए जैसे शब्द आजकल सोशल मीडिया पे धड़ल्ले से प्रयोग में लाए जाते हैं। अंत में सबका एक ही इलाज बताया जाता है- Burnol.

तेरी जली न?, भक्त स्पॉटेड, आपिए, खानग्रेसी, चू*ए जैसे शब्द आजकल सोशल मीडिया पे धड़ल्ले से प्रयोग में लाए जाते हैं, जिसमें सबसे ज़्यादा ‘फेंकू’ शब्द दोहराया जाता है। फेंकू माने लंबी लंबी हवा में बाते छोड़ने वाला।

इन सभी शब्दों को दुहराने से ‘जलन’ होती है। मुझे नहीं ,अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के समर्थकों को।

Burnol - Always keep it handy
बर्नोल हमेशा अपने पास रखें, कभी भी ज़रुरत पड़ सकती है.

आज कल फेसबुक पे बरनोल की सलाह देने वाले लोग ज़्यादा पाए जा रहे हैं, भले ही उन्होनें कभी ख़रीदा न हो। ज्ञात हो कि बरनोल एक मरहम है जिसे जले हुए जगह पे लगाया जाता है। (हम कोई प्रचार नहीं कर रहे, लोड न लीजिएगा) ‘हम’ बस इतना चाहते हैं कि बरनोल को राष्ट्रिय मरहम घोषित कर दिया जाए।

ये कुछ अलग-अलग कारनामें हैं, जिससे ये पता चलेगा कि आख़िर बरनोल को राष्ट्रिय मरहम क्यों बनाया जाना चाहिए-

1. “दिल्ली में ऑड-ईवेन की सफलता के बाद उसे फिर से लागू किया गया है।”
आपिए भाजपाइयों और कांग्रेसियों को बरनोल लगाने की सलाह दे रहे हैं।

2. “काँग्रेस के लाए हुए ‘आधार’ को पहले भाजपा भला बुरा कहती थी, अब तारीफों के पुल बाँध रही है।”
काँग्रेसी अब भाजपाईयों को बरनोल लगाने की सलाह दे रहे हैं।

3. “भाजपा के नेता और रेल मंत्री सुरेश प्रभू ट्रेनों में हो रही समस्याओं का समाधान ट्विटर पे बैठ के ही कर दे रहे हैं।”
भाजपाई काँग्रेसियों और आपियों को बरनोल लगाने की सलाह दे रहे हैं।

4. “भक्तों के विरोध के बाद भी शाहरुख़ ख़ान की फिल्म ‘फैन’ नें अच्छा कारोबार कर लिया है।”
शाहरुख़ के फैन भक्तों को बरनोल लगाने की सलाह दे रहे हैं।

5. “सलमान को उनके पुराने नशे में गाड़ी चढ़ाने वाले केस से राहत मिल गई (भले ही आज तक ये न पता चला हो कि गाड़ी किसने चढ़ाई।)”
सलमान के फैन शाहरुख़ ख़ान के फैंन्स को बरनोल लगाने की सलाह दे रहे हैं।

और ये वाला सबसे मज़ेदार-
6. “अच्छे दिन के इंतेज़ार में सारे लोग एक दूसरे को बरनोल लगाने की सलाह दे रहे हैं।”

अब जब बरनोल की इत्नी डिमांड है, तो क्यों न ये राष्ट्रिय मरहम धोषित हो, और बरनोल पे सब्सीडी लागू करवाया जाए?

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Roohulwa
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राजनैतिक ड्रामा में विशेष रुचि, फोटोशोप से प्यार है.

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