‘कुण्डी मत खड़काओ राजा’ गाने का आध्यात्मिक अर्थ

आपने 'गब्बर इज बैक' फिल्म का ये गाना- 'कुण्डी मत खडकाओ राजा' तो ज़रूर सुना होगा। दुर्भाग्य से कई लोग इस भाव-विभोर कर देने वाले गीत को अश्लील मानते हैं, और इसके पीछे छिपे असली भावार्थ को नहीं समझ पाते।

आपने ‘गब्बर इज बैक’ फिल्म का ये गाना- ‘कुण्डी मत खडकाओ राजा’ तो ज़रूर सुना होगा। दुर्भाग्य से कई लोग इस भाव-विभोर कर देने वाले गीत को अश्लील मानते हैं, और इसके पीछे छिपे असली भावार्थ को नहीं समझ पाते। ये गीत वस्तुतः परमपिता परमेश्वर की अराधना में लिखा और गाया गया है, जिसमें भगवन से अनुरोध किया जा रहा है कि भक्तों को तडपाना छोड़ दें, और शीघ्र दर्शन दें-

Kundi Mat Khadkao Raja 0 Gabbar is back
भगवन से मिलन का करुण-रुदान करती एक भक्तिन युवती।

(आओ राजा) तू क्या चाहे मुझे समझ नी आती,
(आओ राजा) क्यूँ करके इशारे मुझे बुलाती,
(आओ राजा) फिर घर पे बुलाके मुकर क्यूँ जाती,
(आओ राजा) तू छत पे खड़के गाना गाती।

यहाँ परमेश्वर अपने अनुयायियों से पूछ रहे हैं कि भक्तों! तुम लोग आखिर जीवन के उद्देश्य को क्यूँ नहीं समझते। सारा जीवन हमारे दर्शन को तत्पर तो रहते हो, लेकिन जब मैं स्वयं तुम्हारे सामने उपस्थित हो जाता हूँ तो तुम पहचान नहीं पाते, केवल अनन्त अंतरिक्ष की तरफ टोह करके भजन करते रहते हो, जबकि मैं तो साक्षात तुम्हारे पास हूँ। (नेपथ्य में भक्तों की करुण चीत्कार सुनी जा सकती है जिसमे वे अपने राजा, अर्थात भगवन के दर्शन का अनुरोध कर रहे हैं।)

कुण्डी मत खड़काओ राजा, सीधा अन्दर आओ राजा,
हा आ हा!
कुण्डी मत खड़काओ राजा, सीधा अन्दर आओ राजा,
फूल बिछा, परफ्यूम लगा के, मूड बनाओ ताजा-ताजा,
कुण्डी मत खड़काओ राजा, सीधा अन्दर आओ राजा।

हे भगवन, अब हमें तड़पाना छोड़ दीजिये, और शीघ्रता-शीघ्र दर्शन दीजिये। (इसके बाद भक्त की आह सुनी जा सकती है।) हे भगवन… मैंने आपकी आकृति पर पुष्पों की वर्षा करके एवं सुगन्धित अगरबत्ती जलाकर परमेश्वर से मिलन का मूड (मन) बना लिया है। हे भगवन, अब हमें तड़पाना छोड़ दीजिये, और शीघ्रता-शीघ्र दर्शन दीजिये।

ओ, तनिक धीरे-धीरे राजा, ओ, तनिक धीरे-धीरे राजा,
ओ, तनिक धीरे-धीरे राजा, राजा-राजा, धीरे धीरे राजा,
धीरे-धीरे, धीरे धीरे।

हे प्रभु, मेरे इस ह्रदय में तनिक धीरे-धीरे अवतरित होईये, जिससे मैं भक्ति-रस का पान आनंद की पराकाष्ठा के पार जाकर कर सकूं। हे राजा (भगवान को संबोधन), और धीरे-धीरे मेरे मन में समाहित होईये, और धीरे, और धीरे…

(हनी सिंह रैप)

मैं तेरा जानू, तू बन मेरी जान, आज निकालूँगा तेरे प्राण,
तीर लगेगा निशाने पे जाके, करूँगा मैं वैसे टका के,
लाज-शर्म का पर्दा हटा के, रखूँगा मैं तुझे पटरानी बनाके,
मजा उठा ले बेबी आज रात का, बल्ब जगा के जीरो वाट का।

भक्तों की चीख-पुकार सुनकर आखिरकार भगवन द्रवित हो ही उठते हैं, और कहते हैं कि, “मैं ही तेरा जानू (पालनहार) हूँ, तुम मेरी रचना हो, आज मैं तुम्हें दर्शन देकर अपार सुख की अनुभूति कराऊँगा। मेरा तीर (आशीर्वाद) बिलकुल ऐसे निशाने (कठिनाईयों) पर लगेगा कि तुम्हारे सारे भौतिक दुःख दूर हो जायेंगे। इसलिए हे भक्त, अब सांसारिक लज्जा (मोह) की पट्टी जो तुम्हारे चक्षुओं पर पड़ी है, उसे हटा दो, मैं तुम्हे अपना प्रिय बनाकर स्वर्ग में रखूँगा, शर्त बस ये है कि आज सारी रात ध्यान लगाकर जीरो वाट के बल्ब (कम प्रकाश, अर्थात बिना विघ्न) तुम मेरा मनन बस करते ही जाओ, करते ही जाओ।

राजा, धीरे-धीरे राजा-राजा,
धीरे राजा, धीरे-धीरे राजा-राजा, धीरे राजा, धीरे-धीरे राजा-राजा, धीरे राजा, धीरे-धीरे राजा-राजा,
कुण्डी मत खड़काओ राजा, सीधा अन्दर आओ राजा,
धीरे-धीरे, राजा-राजा,
धीरे राजा, धीरे-धीरे राजा-राजा, धीरे राजा, धीरे-धीरे राजा-राजा,
कुण्डी मत खड़काओ राजा, सीधा अन्दर आओ राजा, ओ राजा।

इसके बाद उक्त भक्त ईश-प्रेम के सागर में गोते लगाने लगता है, और प्रभु भजन भजने लगता है, “हे भगवन, धीरे-धीरे मेरी आत्मा में अवतरित हो, धीरे-धीरे भगवन, धीरे-धीरे भगवन! हे भगवन, अब हमें तड़पाना छोड़ दीजिये, और शीघ्रता-शीघ्र दर्शन दीजिये।”

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Jabra
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मेरी गाड़ी बेवकूफों और चाटुकारों से प्रेरणा लेकर चलती है.

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