गुज्जरों ने अब सड़कों पर एक लेन आरक्षित करने की मांग की, जल्द ही आन्दोलन करेंगे

परिवहन विभाग का मानना है कि इससे शहरी इलाकों में रोड-रेज कि घटनाओं में खासी कमी देखने को मिलेगी।

अलग-अलग जातियों के लिए आरक्षित लेन अब जल्द ही भारत की सडकों पर दिखेंगे
अलग-अलग जातियों के लिए आरक्षित लेन अब जल्द ही भारत की सडकों पर दिखेंगे।

जयपुर: राजस्थान सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में 5% आरक्षण मिलने के बाद भी लगता है कि गुज्जर (Gujjar) विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मांग इतनी जल्दी मान लिए जाने से उत्साहित होकर गुज्जरों ने अब देश की सभी सड़कों पर एक लेन आरक्षित किये जाने की मांग कर डाली है।

तीखी मिर्ची  से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए ‘गुज्जर आरक्षण संघर्ष समिति’ के प्रमुख किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा, “हमने सोचा नहीं था हमारी मांग इतनी जल्दी मांग ली जायेगी। हम लोग तो रेलवे ट्रैक और हाईवे के पास टेंट लगाकर महीनों के खाने का सामान साथ लाये थे। आन्दोलन समय से पहले ख़त्म होने पर हमें बहुत गहरा धक्का लगा है।”

“…ये कुछ ऐसा ही है कि अगर दुकानदार से बार्गेनिंग करते वक़्त आप जो दाम बोलो, वो मान ले। आप ठगा हुआ महसूस करते हैं, लगता है और नीचे दाम लगाना चाहिए था। खैर, अब क्यूंकि हमारे सभी आन्दोलनकारी खाली बैठे हैं, तो हमने फिर से एक नयी मांग को लेकर आन्दोलन करने का फैसला किया है। उम्मीद है ये आन्दोलन कुछ 3-4 महीने तो चलेगा ही,” बैंसला ने हुक्का गुड़गुड़ाते हुए हमें आगे बताया।

मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने गुज्जरों की इस मांग का समर्थन किया है।

“देखिये, महत्त्वपूर्ण होने का अनुभव करना मानव की मूलभूत आवश्यकता है। विशिष्ट दिखने के लिए लगभग सभी गुज्जरों और जाटों की गाड़ियों पर उनकी जाति लिखी होती है, कईयों में हूटर भी लगा होता है। इतना सब होने के बाद भी वो सड़क पर दीन-हीन महसूस करते हैं। ऐसे में सरकार का फ़र्ज़ बनता है कि उनकें आत्म-सम्मान के लिए एक लेन आरक्षित करे, जिससे वो चिंतामुक्त होकर गर्व से आवागमन कर सकें,” बीकानेर मनोविज्ञान संस्थान के प्रमुख ने नाम न छापने की शर्त पर हमें बताया।

ये पूछे जाने पर कि ये भी मांग मान ली गयी तो वे अगला कदम क्या उठाएंगे, एक आन्दोलनकारी ने रेलवे ट्रैक उखाड़ते हुए कहा, “फिर हम सरकारी नौकरियों में अपने लिए ‘मसाज पार्लर’ खोले जाने की मांग करेंगे। जाति सशक्तिकरण के लिए ये एक मील का पत्थर साबित होगा।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Jabra
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