बीजेपी का 60 सालों का रोना

मैंने अपने भक्त दोस्त भीड़ू से पूछ लिया: भिडू , यह बता, बीजेपी पिछले 60 सालोंको क्यों बार बार रो रही है। बीजेपी पहले से ही सत्ता पर होती तो क्या होता?

नरेंद्र मोदी आम आदमी के साथ
नरेंद्र मोदी आम आदमी के साथ

मैं: यार भिडू, BJP वाले पिछले 60 सालों का रोना बहुत रो रहे है। चुनाव प्रचार में इसका जिक्र किये बिना कोई भाषण संपन्न ही नहीं होता। ठीक है अब ,मिटटी डालो ! रात गई बात गई !

भिडू ( गंभीर मुद्रा धारण करके बोला ): BJP वालोंको भ्रम ने भरमा रख्खा है। BJP वाले खुदको ही भारत देश की संतान और देश को अपनी विरासत समझते है। अन्य देशवासीयोंको सौतेला। वो भी अपने से छोटा। रोना तो बनता है। 60 साल में देश का विकास उनकी इच्छा अनुसार जो नहीं हुआ।

मैं: ओबामा भारत आये थे तब मोदीजी कैसे लट्टू होकर बार बार ओबामाजी को अपने बाहुपाश में लेकर प्रेमभाव दरसा रहे थे। उनके जाने के बाद वापस दिल्ली का चुनाव गरमा गया है। बड़े संयुक्त परिवार में आपस में बाल पकड़कर लड़ाई ज़गड़ा करते बच्चे किसी महेमान के आते ही कैसे शयाने होकर बैठ जाते है और महेमान के वापस जाते ही फिरसे शुरू हो जाते है। ठीक वैसा ही हाल दिल्ली का है।

भिडू : हाँ यार। कल मैं टेलीविज़न देख रहा था , अचानक आवाज़ mute हो गई। मेरा चार साल का बच्चा मोदी को दोनों हाथ चारो ओर हिलाते देख, डर के मारे जोर जोर से रोने लगा। तुम्हारी भाभी दौड़ के रसोई घर से बाहर आई और चिल्लाई ” बंद भी करो टीवी , देखते नहीं ? बच्चा डर गया है , फिर भी टीवी में आँखे गड़ाए बैठे हो। मोदी से अब बच्चे भी डरने लगे है। सर पर पता नहीं क्या क्या रंगबिरंगी पहनकर आता है और हाथोंको जोरोंसे हिला हिला कर दहाड़ता रहता है।  बाद में मेरा भी टीवी ओर ध्यान गया तो वास्तव में बिना आवाज़ के नज़ारा डरावना ही दिख रहा था। मैंने भी फिर मोदी और बीवी, दोनों के डर से टीवी बंद कर दिया। यार…. यह बेदी तो पगला गई दिखती है। सठिया गई है , बावली। क्या क्या बोलती रहती है। खुद का नाम विकास बेदी बताने लगी है। भई, बीजेपी की गोद में बैठते ही उनमे शक्तिका , उत्साहका, उन्मादका जो जोश उमड़ पड़ा है , जो नया संचार प्रवाहित हो गया है। लगता है , अब वो रूकनेवाली नहीं है। दिल्ली को पलट के ही दम लेगी।

मैंने पूछ लिया : यह सब छोड़ भिडू , तूने मेरे पहले सवाल का जवाब काट दिया। यह बता, बीजेपी पिछले 60 सालोंको क्यों बार बार रो रही है। बीजेपी अगर पहले से ही सत्ता पर होती तो क्या होता ?

भिडू: ऐसा है ना… विकास तो हुवा है लेकिन बीजेपी को लगता है कि पिछले 60 साल में देश का विकास उनकी इच्छा अनुसार नहीं हुआ। क्रिकेट में पवेलियन में बैठा बारहवाँ खिलाडी इसी सोच में होंठ चबाता रहता है कि मैं बैटिंग में होता तो सेंचुरी ठोकता। अब सुन….. बीजेपी होती तो क्या होता :

१। भारत-पाकिस्तान लंगोटिया यार होते। मोदीको ओबामाजी को ” यूँ ” गले नहीं पड़ना पड़ता।
२। दाऊद को भागना नहीं पड़ता , उल्टा पीएमओ ऑफिस में रिकवरी डिपार्टमेंट में जॉब कर रहा होता।
३। नवाज़ शरीफ़ के साथ घनिष्ठ घरेलू सम्बन्ध होते , आपसी मेलजोल शाल और साडी तक ही सिमित नहीं होता , बल्कि सूट ,चूड़ीदार पायजामा कुर्ता का भी लेनदेन होता।
४। वाघा बॉर्डर पर दोनों देश के सिपाही रोज़ आपस में कबड्डी खेलने का मज़ा लूटते। सीमापर जवान एक दूसरे पर दिवाली के राकेट चलाते।
५। हर एक देशवासी के हाथ में ” जन धन योजना ” का ATM कार्ड होता। काला धन हर एक के खाते में डायरेक्ट TDS काटके जमा हो गया होता। इतने सालोंमे ब्याज जमा हो हो कर रकम दोगुनी चौगुनी हो जाती। मोदीजी को ब्याज समेत चुकाने का बहुत चाव है , वह तो वोट का बदला भी ब्याज समेत चुकानेका वादा करते रहते है।
६। गंगा माँ और भारत तो कब का स्वच्छ हो गया होता , बल्कि गन्दा ही नहीं होने देते। लोग अपने अपने घरोंमें आराम से अखबार पढ़ते पढ़ते हल्का हो लेते। मोदी-चाय से कब्ज भी नहीं रहती।

{लेकिन साला घर का आँगन चार चार बच्चोंसे भर जाता। एक एक बच्चा सेना के लिए तो ठीक है लेकिन ,एक एक बच्चे के हिसाब से साधु, बाबा, साध्वी की संख्या खतरे के निशान को पार कर जाती। ज़रा सोच ! आज गिने चुने होते हुवे भी नाक में कितना दम कर रख्खा है , निठ्ठलोंने ?
PM के कपड़ो पर का खर्चा का देश के आम बजट में अलग से प्रावधान रखना पड़ता, सो अलग !!!! }

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Vishnu Tibdewala
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हास्य हेतु व्यंग्य। कटाक्ष ना समझे। कटाक्ष को व्यंग्य ना समझे।

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