PM और साथ में ओबामाजी भी रेडियो पर “मन की बात” करेंगे !

पीएम मोदी के बाद अब ओबामाजी भी अपने "मन की बात" करने जा रहे हैं। "आल अमेरिका रेडियो" ने इसके लिए अभी से कमर कास ली है।

“मन की बात” शब्द सुनकर अनायास ही किसी सखी का ख्याल आता है। वो धीरे धीरे कोमल स्वर में बाते करना। सखियाँ आपस में मिलकर अपने अपने मन की बात सुनती सुनाती है।

ओबामा अपने मन की बात रेडियो पर सुनाते हुए
ओबामा अपने मन की बात रेडियो पर सुनाते हुए

आजकल मोदीजी को टेलीविज़न और मीडिया कम पड रहा है। उनको शायद कांग्रेस पर भरोषा कम ही है। उनको लगता है, कांग्रेस ने गाँव गाँव टेलीविज़न नहीं पहुँचाया है। अरे भाई , गाँव में घर-घर में टेलीविज़न भी है, और करीब करीब हर एक के हाथ में एक एक मोबाइल भी पहुंचा दिया गया है। तभी तो भाषण सुन सुन कर लोगोंने आपको यहाँ तक पहुँचाया है। खेर …….

PM और साथ में ओबामाजी भी रेडियो पर मन की बात करेंगे, इतना सुनते ही शरीर में एक लहर सी दौड़ जाती है। रेडियो का मज़ा ही कुछ और है। बगीचे में, चौराहों पर कहीं भी, ( प्रातः कालीन समय हो तो प्रातः क्रिया करते करते भी) गोल सर्किल बनाके बैठ जाओ ,एक हाथ में गरमागरम चाय की प्याली हो, बीच में मर्फी ब्रांड या फिलिप्स ब्रांड का रेडियो हो, भई वाह……….मज़ा आ जाता है। हम तो पुराने ज़माने में इस तरह क्रिकेट की कमेन्ट्री सुना करते थे। लेकिन भाषण वाषण कभी ट्राई नहीं किया।

आजकल शायद रेडियो अब गाँव में ही बचा होगा। भाषण प्रेमी भक्तजनोंको गाँव तक लम्बा होना पड़ेगा। खेर…… उनकी वो जाने।

PM जी तो रेडियो पर मन की बात बता देंगे। लेकिन जनता की अपने मन की बात मन ही मन में दबाकर रखनी पड़ती है। उसे तो यह भी पता नहीं कि “चार बच्चे” पैदा करे या नहीं ? करे तो कौन खर्चा- पानी देगा। काल धन में अपना हिस्सा कब तक “जन धन योजना” खाते में जमा होगा ? ओबामाजी कौनसी भाषा में बोलेंगे ? क्या क्या बोलेंगे ? अमेरिका आनेका न्योता दिया तो कितने लोगोंको जाना है ?

कन्फ्यूज्ड हो गए क्या ? भई रेडियो सुनने वाला ज्यादातर देहाती ही होगा ना ? उसके मन में तो ऐसे ही सवाल होंगे ना ?

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Vishnu Tibdewala
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हास्य हेतु व्यंग्य। कटाक्ष ना समझे। कटाक्ष को व्यंग्य ना समझे।

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