‘विकास’ की अभिलाषा

बड़बोले त्रिवेदी की कलम से माइक्रो पोएट्री - विकास की अभिलाषा

Narendra Modi Namaste
हे नाथूराम!

चाह नहीं मैं भारत के अन्य राज्यों में पाया जाऊं,

चाह नहीं मैं GDP -NDP किसी से तोला जाऊं,

चाह नहीं किसी इंडेक्स पर पहले आऊँ,

चाह नहीं मैं अन्य किसी के पास दिखूं, भाग्य पर इठलाऊँ,

मुझे छांट लेना ए लेखक, उस पत्र में तुम देना लेख,

वोट के खातिर भाषण देने जाएँ जहाँ वो ‘साहेब फेक’!

  • ‘बड़बोला’ त्रिवेदी।
डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
बड़बोला त्रिवेदी
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बडबोला

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