विकास का अपहरण

कोई नहीं जानता वो कहाँ गया, अभी कुछ दिन पहले ही तो हम सब उसकी बातें किया करते थे, लगता है विकास का अपहरण हो गया है, लेकिन क्यों और कैसे?

मित्रों,
बड़े ही खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि श्री नरेंद्र मोदी जी के लाड़ले “विकास” का अपहरण हो गया है। कोई कह रहा था कि “राष्ट्रभक्त गोडसे” ने राष्ट्रहित में इस अपहरण को अंजाम दिया। इस घटना के पीछे बहुत सारे कयास लगाये जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो “विकास” ने ‘धर्म परिवर्तन’ कर लिया था और पहचान छुपाने के लिए अपना नाम बदलकर “गिरावट-ए-रूपया” रख लिया था। पहले तो “विकास” के रिश्तेदारों ने उसकी “घर वापसी” के लिए उसे तरह-तरह के प्रलोभन दिए। हिन्दुस्तान से लेकर पाकिस्तान तक में पेट्रोल-डीजल तथा अन्य ईंधनों के रेट कम कर दिए। कश्मीर में रैली करवा दी, रैली में इंडियन आर्मी से माफ़ी भी मंगवा दी और ‘वन्दे मातरम्’ तथा ‘भारत माता की जय’ भी नहीं बोला। फिर भी “विकास” राजी नहीं हुआ।

विकास के अपहृत होने के बाद खस्ताहाल देशवासी शोक मनाते हुए
विकास के अपहृत होने के बाद खस्ताहाल देशवासी शोक मनाते हुए

“विकास” के एक रिश्तेदार ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर ये बताया कि मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही विकास और मोदी जी के रिश्तों में खटास आ गयी थी। कारण यह था कि मोदी जी प्रधानमंत्री बनते ही “विकास” को उसके ननिहाल गुजरात में छोड़ अाये थे। “विकास” को तब और बुरा लगा जब मोदी जी ने “धैर्य” को अपने धर्मपुत्र के रूप में अपना लिया और लोगों को भी उसे अपनाने को कहने लगे। बहरहाल, “विकास” भी मोदी जी की बात मानकर “धैर्य” को अपना भाई मानने लगा और देखते-देखते छह महीने बीत गए। लोग-बाग़ “विकास” को भूलकर धैर्य को अंगीकार करने लगे। यहाँ तक कि स्वयं मोदी जी ने इन छह महीनों में “विकास” की कोई सुध नहीं ली। और तो और “विकास” के अन्य नज़दीकी रिश्तेदारों ने भी उससे मुंह मोड़कर रामज़ादों-हरामजादों, राक्षसों और पागलों पर कंसन्ट्रेट करना शुरू कर दिया। इधर कभी अपने रिश्तेदारों का सबसे दुलरुआ रहा “विकास” प्यार के दो बोल सुनने के लिए तरस रहा था और उधर उसकी स्मृति बुआ ‘संस्कृत’ के लिए ‘जर्मन’ से टंटा नाधे बैठी हुई थी।

मोदी जी के सरकार में ‘विदेश आगंतुक स्वागत मंत्री’ और विकास की सबसे बड़ी बुआ सुषमा जी भी गीता पर महाभारत मचाने को मचल रही थी, पर भतीजे “विकास” पर उनका भी ध्यान नहीं गया। मार्गदर्शक मंडल वाले बूढ़ा बाबा के मुंह में दांत ही नहीं बचा था कि वो भी “विकास” की ओर किसी का ध्यान आकृष्ट करते। “विकास” के सबसे फेवरेट चाचा शाह अंकल का बिस्खोपड़ा दिमाग मिस कॉल मारने/ मरवाने में लगा था। कभी सबके जुबान पर चढ़ा रहने वाले “विकास” की इस कदर उपेक्षा अब उसके बर्दाश्त से बाहर हो चुकी थी। इसलिए “विकास” ने ये निर्णय लिया कि अगली बार जब मोदी जी विदेशों से स्वदेश यात्रा पर आएंगे तो वह उनसे अपना हक़ मांगने जाएगा। हुआ भी ऐसा ही।

“विकास” एक दिन प्रधानमंत्री मोदी से उनके आवास पर मिलने पहुंचा और मिलते ही उनसे उनसे अपनी उपेक्षा का हिसाब मांग बैठा। “हिसाब” शब्द को सुनते ही मोदी जी पूरी तरह से भड़क गए और घंटे भर पहले रैली में हिसाब पर जो भाषण दिया था उसी को और ऊँचे टोन में “विकास” पर झाड़ दिया। मोदी जी ने गुस्साते हुए कहा, “मित्रों, उन्होंने 60 साल का हिसाब नहीं दिया और तुम चाहते हो कि मैं छह महीने का हिसाब दूँ, जाओ नहीं देता कोई हिसाब-विसाब। जो करना है कर लो।” ‘विकास’ मोदी जी की झिड़की से बहुत डर गया, फिर भी सहमते हुए बोला कि “मोदी जी अपने इस लाड़ले, मॉडल से पुत्र की फटेहाली पर कुछ तो रहम खाओ। विकास को तवज्जो नहीं देना है, मत दो। छह महीने बीत गए, मेरे 15 लाख तो वापस कर दो।”

“विकास” के इतना कहते ही मोदी जी आगबबूला हो उठे और “चल जल्दी निकल…. भाग यहाँ से” कहते हुए “विकास” को भगा दिया। निराश-हताश-सा “विकास” रोता हुआ वापस अपने ननिहाल गुजरात आ गया। इस घटना के अगले ही दिन “विकास” सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकला और न जाने कहाँ गायब हो गया!

IB का कहना है कि “विकास” का अपहरण हो गया। लेकिन मोदी जी के “विज़न” के नीचे से “विकास” का अपहरण होना निश्चित तौर पर संदेह की स्थिति पैदा करता है। बहरहाल मीडिया के लोग इस घटना को राष्ट्रहित में देख रहे हैं।

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Kumar Keshav
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