करना मुझको माफ़, मैं अच्छे दिन नहीं ला पाऊंगा!

ये कविता उस भगवन के करुण कंठ से निकली है, जो अपने भक्तों से किये वादों को ना निभा पाने से भाव-विह्वल है।

एक भगवान अपने भक्तों से हाथ जोड़कर अपनी लाचारी प्रगट करते हुए.
एक भगवान अपने भक्तों से हाथ जोड़कर अपनी लाचारी प्रगट करते हुए.

ओ मोदी मुदित मंदबुद्धि मित्रों
ओ भाषण-भुक्त भ्रष्टबुद्धि भक्तों
ओ लुटियन-चारण चिंतक औ
‘मॉडल’ पर लट्टू परबुध आसक्तों
नये साल पर मैं घर-घर अपनी दिनदर्शिका* भिजवाऊंगा
करना मुझको माफ़ मैं अच्छे दिन नहीं ला पाऊंगा।

सौ क्या दो सौ दिन बीत गये
वादे काले धन के अतीत भये
अगली बार भी उसी पुराने भाषण को दोहराऊंगा
करना मुझको माफ़ मैं करिया धन नहीं ला पाउँगा।

किसान ख़ुदकुशी रोज कर रहे
बलात्कार भी रोज बढ़ रहे
देश की चिंता जब भी होगी मैं विदेश घूम आऊंगा
करना मुझको माफ़ मैं बस यूँ ही धूम मचाउंगा

दिन-ब-दिन रुपया गिरा जा रहा
छूने अडवाणी की उम्र आ रहा
मेरे हाथ में जो है जैसे ‘फेक इन इंडिया’ चलाऊंगा
करना मुझको माफ़ मैं गिरता रुपया नहीं उठाऊंगा।

सीमा पर फायर सीज़ नहीं है
फ़िक्र उसकी हरगिज नहीं है
क़ीमत जवान के सर की भूलो पेंशन ‘वन रैंक’ न चुकाऊंगा
करना मुझको माफ़ पाक को मैं सबक नहीं सिखाऊंगा।

स्वच्छता अभियान बहाना है
झाड़ू लिए हाथ में कुछ फोटू खिंचवाना है
फर्जी सफाई करते सेलेब्स की फ़ोटो मैं ट्वीटियाऊंगा
करना मुझको माफ़ मैं कोई क्योटो नहीं बनाऊंगा।

मैं ही खबर हूं मुझे ही चलाना
हर एंगल से बस मुझे ही दिखाना
मक्खी मीडिया तेरे साथ मैं सिर्फ सेल्फ़ी ही खिंचवाऊंगा
करना मुझको माफ़ मैं तुम्हें जवाब नहीं दे पाउँगा।

विकास का मुद्दा गौण हो गया
मुद्दों पर मैं मौन हो गया
तेरी नहीं सुनूंगा अपने ‘मन की बात’ सुनाऊंगा
करना मुझको माफ़ मैं यूँ ही बातों से बात बनाऊंगा।

(*दिनदर्शिका=Calendar)

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डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Kumar Keshav
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आजादीपसंद, स्वच्छन्द, आरामतलबी, अमितभाषी

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