एक और बकवास चुनावी विश्लेषण !

यदि मजबूत सरकार की परिभाषा 'केवल लोकसभा में संख्या' तक ही निहित है तो सच में लम्बे समय बाद देश को एक मजबूत सरकार मिली है। हलाकि देश एक जिम्मेदार, मजबूत विपक्ष चुनने से चुक गया। जिसकी कीमत आने वाले समय में पता चलेगी।

चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान और अब चुनाव के बाद इतना कुछ पढ़ लिया है की दिमाग के अन्दर तथ्यों की गुलाटी रुकने का नाम नहीं ले रही है। मोदी की जीत के बाद मीडिया मदमस्त हो चला है। ऐसा लग रहा है मानो भारत की सब मुलभुत समस्याए या तो बहुत पीछे छूट चुकी है या बहुत जल्द हम इस सब से निजात पा ही लेंगे।

भारतीय संसद
भारतीय संसद

मोदी की जीत के बाद जहाँ BJP का कोई सानी नहीं नजर आता वहां प्रतिद्वंदी SP, BSP, JD(U), AAP यहाँ तक की कांग्रेस को ख़तम मान चुके है। इसमें कोई विवाद नहीं की मोदी ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। में आपको ये बताकर पकाना नही चाहता की ये जीत मोदी/बीजेपी या संघ में से किसकी जयादा है। इन विश्लेषणों से दिमाग ध्वस्त सा हो चूका है। यदि मजबूत सरकार की परिभाषा ‘केवल लोकसभा में संख्या’ तक ही निहित है तो सच में लम्बे समय बाद देश को एक मजबूत सरकार मिली है। हलाकि देश एक जिम्मेदार, मजबूत विपक्ष चुनने से चुक गया। जिसकी कीमत आने वाले समय में पता चलेगी। में नहीं कह रहा की इंदिरा गाँधी के दौर की इमरजेंसी जैसा कुछ लौट आयेगा पर राम मंदिर, आर्टिकल 370 और कमान सिविल कोड जैसे मुद्दों के लिए बीजेपी/संघ अब काफी मजबूत इस्थ्ती में है।

चुनावी धुरंधरो के हिसाब से मोदी की जीत ने कांग्रेस का खात्मा कर दिया है। हलाकि तथ्य अभी इस बात की पुष्टि नहीं करते। बीजेपी सबसे कम (31% ) वोट के साथ भारतीय संसद में पहली बार बहुमत के साथ काबिज हुई है। लगभग इतनी ही सीट जब कांग्रेस को मिली थी तो ये वोट 40% था। इतना ही नहीं, कांग्रेस ने भले ही इस चुनाव में अपने इतिहास की न्यूनतम सीट पाई हो पर उनका वोट शेयर (19.3%), 2009 के BJP के वोट शेयर (18.5%) से अधिक है। एक और गंभीर बात यह है की इस लोकसभा में पिछली लोकसभा के मुकाबले उमीदवारो की जीत का अंतर बहुत जयादा बढ़ा है। जो 2014 और 2009 में क्रमशः 15% और 9% है। ये साफ तौर पे बताता है की मोदी विरोधी वोट किस तेरेह से विरोधियो में बटा है। BSP और SP उत्तरप्रदेश में पड़े ही नकार दी गयी हो, दोनों दलों को अभी भी लगभग 20% मत मिले है। हलाकि AAP अपेक्षा के मुकाबले कुछ ज्यादा बेहतर नहीं कर पाई है।  दिल्ली में उनका वोट शेयर बढ़ने के बावजूद, खाता भी नहीं खुला। फिर भी BSP के बाद केवल AAP एक ऐसी पार्टी है जो 400 से अधिक सीट से लड़ी। इसका फायदा उन्हें पंजाब में मिला। दिल्ली के बाद पंजाब में AAP का भविष्य साफ़ नजर आता है। 2009 में बीजेपी भी दिल्ली में साफ़ हो गयी थी। इसीलिए AAP की संभावनाओ को दिल्ली में नकारना मुर्खता होगी। बल्कि कांग्रेस के वोट शेयर गिरने के बाद दिल्ली में लड़ाई त्रिकोणीय के बजाये फिर से दो पार्टियों के बीच रह गई है। 4 सांसदों के साथ ही सही AAP को संसद में गंभीर भूमिका निभानी होगी। लेफ्ट, कांग्रेस और आप के बाद बाकी कोई भी दल क्षेत्रीय सोच से बाहर निकलता हुआ नहीं दीखता। इसलिए क्षेत्रीय दलों से काफी कम सीट होने के बावजूद राष्टीय परिपेक्ष में AAP ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अब जब मोदी जी प्रधानमंत्री बन ही गए है तो मीडिया उनके भविष्य के काम को लेकर पट सा गया है। भारतीय या विदेशी मीडिया, दोनों तरफ से ऐसे लेखो की झड़ी लग गयी है जिसमे भारत को आने वाले दिनों में बड़ी आर्थिक शक्ति बताया जा रहा है। मोदी भारत में निवेश के सब रस्ते खोल देंगे। हलाकि में अभी तक एक भी ऐसा लेख नहीं खोज पाया जिसमे बतया गया हो सामजिक विषमता कैसे दूर होगी। नारी सुरक्षा कहाँ से आयेगी, रोजगार कहाँ से पैदा होंगे। खैर इस सब के लिए इतना उतावला होना बैमानी होगी। नयी सरकार को समय देना होगा। इस सब के बीच एक महत्वपूर्ण बात सबने नजरअंदाज कर दी है। मोदी जी ने देश में सबसे जयादा रैलिया की। होलोग्राम से हर तरफ छा गए। विज्ञापनों से दिवार से लेकर मष्तिस्क तक सब पाट दिए गए। इन सब के लिए पैसा आया कहाँ से। शायद जिनकी जैबो में ये पैसा गया है वो ये सवाल कभी नहीं पूछेंगे। हलाकि चुनाव आयोग ने हर चुनाव क्षेत्र के लिए 70 लाख की सीमा तय की है फिर भी अनुमान है BJP ने इसबार करीब 5000 करोड़ तक खर्चा किया है। बदनसीबी ये है चुनावी खर्चा केवल नामांकन भरने के बाद जोड़ा जाता है। अब जब मोदी जी आपके वोट से जीत भी गए है, क्या आपको ये सवाल पूछना मुनासिब नहीं लगता ? छोडिये भी ये पैसा कौन आपकी जेब से गया है पर जिसने दिया है, उसने क्यूँ दिया ये सवाल तो बनता ही है। आप इस सवाल का जवाब खोजते रहिये, मेरा क्या है में तो ये सब लिखता ही रहूँगा। उम्मीद करता हूँ मोदी जी की नयी सरकार में भी लिखने और पूछने की आजदी बनी रहेगी।

[This is a repost from Sishil’s blog entry at http://sushilktomar.blogspot.in/2014/05/blog-post_19.html]

Discussion

comments

डिस्क्लेमर: यह एक हास्य-व्यंग्य लेख है और इसके सभी पात्र, घटनाएं अादि काल्पनिक हैं। कृपया इस खबर को सच समझकर व्यर्थ मे अपनी भावनाएं अाहत न करें। अाप भी तीखी मिर्ची ज्वाईन करके अपनी रचनाएं पोस्ट कर सकते हैं
Sushil Kumar Tomar
About Sushil Kumar Tomar 2 Articles
Molecular Biologist. Interested in Science, Technology, Education, Entrepreneurship, Sociology, Human Resource & Indian Affairs; which is usually politics.

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*